मध्य पूर्व (Middle East) के समुद्री इलाकों से अमेरिकी नौसेना (US Navy) के शक्तिशाली एयरक्राफ्ट कैरियर और डेस्ट्रॉयर अचानक गायब हो गए हैं। सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि ओमान की खाड़ी और अरब सागर में अमेरिका ने अपने जहाजों को पीछे हटा लिया है। इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान की नई एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासिम बसीर’ (Qasem Basir) को माना जा रहा है। जानिए कैसे एक किफायती मिसाइल ने 13 अरब डॉलर वाले अमेरिकी युद्धपोतों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया।
5 पॉइंट्स में समझें: क्यों पीछे हटे अमेरिकी युद्धपोत?
- कासिम बसीर का खौफ: ईरान की एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल ‘कासिम बसीर’ की आहट मिलते ही अमेरिकी नौसेना ने अपने जहाजों को मिसाइल रेंज से बाहर कर दिया।
- सैटेलाइट तस्वीरों से सबूत: ओमान की खाड़ी से USS गेराल्ड आर. फोर्ड और USS जॉर्ज वाशिंगटन जैसे कई बड़े युद्धपोत 600 नॉटिकल मील पीछे हट चुके हैं।
- लागत और नुकसान का गणित: 13 अरब डॉलर (लगभग 1 लाख करोड़ रुपये) के फोर्ड-क्लास एयरक्राफ्ट कैरियर और 4,500 नाविकों की सुरक्षा के लिए अमेरिका ने जोखिम न लेने का फैसला किया।
- CENTCOM का स्वीकारनामा: अमेरिकी मध्य कमान (CENTCOM) ने भी माना कि उनके जहाज मिसाइल हमलों की चपेट में आए थे।
- क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बदला: ईरान तट के पास अमेरिकी उपस्थिति घटने से खाड़ी देशों की सुरक्षा रणनीति और तेल आपूर्ति मार्गों पर असर पड़ने की संभावना है।
ईरान की ‘कासिम बसीर’ बनाम अमेरिकी बेड़ा: मुख्य तुलना
| विशेषताएं / मानक | ईरान की ‘कासिम बसीर’ मिसाइल | अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर (USS Gerald R. Ford) |
| प्रकार / श्रेणी | एंटी-शिप बैलिस्टिक मिसाइल (कैरियर किलर) | फोर्ड-क्लास सुपरकैरियर (सुपर वॉरशिप) |
| अनुमानित लागत | बेहद कम (किफायती) | लगभग 13 अरब डॉलर |
| मारक क्षमता (रेंज) | लगभग 1,200 किलोमीटर | वैश्विक पहुंच (ईरान से 600+ नॉटिकल मील दूर रहने को मजबूर) |
| तकनीक | थर्मल और ऑप्टिकल सीकर (सटीक निशाना) | अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस और रडार सिस्टम |
| सामरिक प्रभाव | कम लागत में बड़े जहाजों को बेअसर करने में सक्षम | भारी लागत और जान-माल के जोखिम के कारण पीछे हटना पड़ा |
आधुनिक युद्ध में क्यों फेल साबित हो रही भारी-भरकम तकनीक?
इस घटना ने साबित कर दिया है कि आधुनिक समुद्री युद्ध (Naval Warfare) में केवल आकार और ताकत ही काफी नहीं है। लंबी दूरी की सटीक और सस्ती मिसाइलें अब अरबों डॉलर के जहाजों के लिए काल बन रही हैं। अमेरिका ने नाकाबंदी की बात तो कही है, लेकिन अपने युद्धपोतों को दूर रखकर वह अब दूर से ही निगरानी रखने की कोशिश कर रहा है, जिससे उसकी समुद्री घेराबंदी की प्रभावशीलता पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।