बलिया: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष राम गोविंद चौधरी का शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ के पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। वह 74 वर्ष के थे। उनके निधन से समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर है। बलिया की राजनीति के साथ-साथ प्रदेश की विधानसभा में भी उनका लंबा राजनीतिक सफर रहा।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
राम गोविंद चौधरी का जन्म 7 सितंबर 1953 को बलिया के गोसाईपुर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय द्वारिका चौधरी था। उन्होंने स्नातक के बाद एलएलबी की पढ़ाई की और पेशे से अधिवक्ता रहे। राजनीति में आने से पहले उन्होंने छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था।
1977 में पहली बार विधानसभा पहुंचे
राम गोविंद चौधरी ने 1977 में चिलकहर विधानसभा सीट से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद 1980, 1985 और 1989 में भी वह विधायक चुने गए। 1991 में भी उन्होंने विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया।
बाद के वर्षों में उनकी राजनीतिक सक्रियता बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में रही। उत्तर प्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें आठ बार निर्वाचित सदस्य के रूप में दर्ज किया गया है।
मुलायम सिंह सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
राम गोविंद चौधरी समाजवादी राजनीति के कई दिग्गज नेताओं के साथ काम करते रहे। उनके राजनीतिक सफर पर चंद्रशेखर और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं का प्रभाव रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में वह चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु भी बताते रहे थे।
वर्ष 2003 से 2007 तक वह मुलायम सिंह यादव की सरकार में मंत्री रहे। इसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में भी उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी मिली।
2012 में बांसडीह से जीते, अखिलेश सरकार में बने मंत्री
2012 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बनाया गया। विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार, मार्च 2012 से मार्च 2017 तक उन्होंने अखिलेश यादव मंत्रिमंडल में जिम्मेदारी संभाली।
2017 में बने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष
2017 के विधानसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने राम गोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक सूची में 27 मार्च 2017 से नेता प्रतिपक्ष के तौर पर उनका नाम दर्ज है। इस दौरान उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाई और सरकार की नीतियों तथा विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए।
विधानसभा रिकॉर्ड के मुताबिक, उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।
2022 में बांसडीह से मिली चुनावी हार
2022 के विधानसभा चुनाव में राम गोविंद चौधरी ने बांसडीह सीट से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें हरा दिया।
इस हार के साथ बांसडीह सीट पर पहली बार भाजपा का खाता खुला और आठ बार विधायक रहे राम गोविंद चौधरी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा।