नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेते हुए कथित ‘वोट चोरी’ को ‘कानून चोरी’ और फिर ‘संस्था चोरी’ से जोड़ा। राहुल गांधी का तर्क है कि अगर किसी चुनाव में वोटों में गड़बड़ी हुई और उन्हीं वोटों से सांसद चुने गए, तो उनके जरिए बनाए गए कानूनों और किए गए संस्थागत बदलावों की वैधता पर भी सवाल उठते हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का भी जिक्र किया। उनका बयान उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने कम से कम 14 मौकों पर आयोग के फैसलों से असहमति जताई थी। इन आपत्तियों में मतदाताओं के नाम जोड़ने-हटाने और वोटर डेटा से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए थे।
1. ‘वोट चोरी’ को ‘कानून चोरी’ से जोड़ा
राहुल गांधी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि अगर वोटों में गड़बड़ी हुई है तो उन्हीं वोटों से चुने गए जनप्रतिनिधियों द्वारा बनाए गए कानून और किए गए संस्थागत बदलाव भी सवालों के घेरे में आते हैं।
2. CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को अपने आरोपों के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के वोट की सुरक्षा करना है और इसी जिम्मेदारी को लेकर उन्होंने CEC के इस्तीफे की मांग की।
3. दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का किया जिक्र
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त एसएस संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों के दौरान SIR और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।
हालांकि, चुनाव आयोग ने रिपोर्ट के बाद कहा था कि अलग-अलग राय और सुझाव संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। आयोग के मुताबिक, अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
4. 2024 के चुनावों में गड़बड़ी का दावा
राहुल गांधी ने भारतीय चुनावों में कथित धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में भी गड़बड़ी का दावा किया और कहा कि उनके पास इसे लेकर पर्याप्त जानकारी है। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आरोप है, जिसे चुनाव आयोग ने स्वीकार नहीं किया है।
5. एंटी-इंकम्बेंसी के पैटर्न पर उठाया सवाल
राहुल गांधी ने चुनावों में सत्ता-विरोधी लहर के पैटर्न का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली सरकारों के खिलाफ आमतौर पर एंटी-इंकम्बेंसी देखने को मिलती है, लेकिन बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मामले में उन्हें ऐसा पैटर्न नजर नहीं आता। इसके लिए उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के चुनावी नतीजों का भी उल्लेख किया।
6. इंदिरा गांधी के दौर का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर का उदाहरण देते हुए कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले नेताओं और दलों के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल बनता रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि नरेंद्र मोदी और बीजेपी के मामले में उन्हें वैसा पैटर्न क्यों दिखाई नहीं देता।
7. वोट को बताया संविधान की ताकत
राहुल गांधी ने वोट को लोकतंत्र की बुनियाद बताया। उनके मुताबिक, वोट के जरिए सरकार चुनी जाती है, सरकार कानून बनाती है और उन्हीं कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं। उनका कहना था कि अगर वोट की व्यवस्था कमजोर होती है तो संविधान की ताकत भी प्रभावित होती है।
8. ज्ञानेश कुमार को ‘सरकारी गवाह’ बनने की सलाह
राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को ‘सरकारी गवाह’ बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसा करना देशहित में होगा। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर कथित चुनावी साजिश के शीर्ष पर होने का आरोप भी लगाया और उनकी भूमिका की जांच की मांग की।
9. मोदी-शाह पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट की अहमियत को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने दोनों नेताओं की भूमिका की जांच की बात भी कही। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने कुछ वीडियो का उल्लेख किया और दावा किया कि उनमें बीजेपी नेताओं के चुनाव और भविष्य की सरकार को लेकर दिए गए बयान दिखाई देते हैं।
10. चुनाव आयोग की भूमिका पर उठाया सवाल
राहुल गांधी के बयान का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका रही। उन्होंने कहा कि मतदाता के वोट की सुरक्षा करना आयोग की जिम्मेदारी है और इसी मुद्दे पर वह लगातार सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR सहित उसके फैसले आयोग की सामूहिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाते हैं। इस तरह मामले में राहुल गांधी के आरोपों के साथ चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर भी राजनीतिक बहस तेज हुई है।