न्यूयॉर्क। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा है कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाना चाहता और अपने परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार है। पेजेशकियन ने यह भी संकेत दिया कि तनाव कम करने के लिए तेहरान यूरेनियम संवर्धन के स्तर को कम करने और अपने परमाणु भंडार को डायल्यूट करने पर भी विचार कर सकता है।
‘क्या ईरान परमाणु बम चाहता है?’ पेजेशकियन का सीधा जवाब
संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे पेजेशकियन ने फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम ‘स्पेशल रिपोर्ट’ में पत्रकार ब्रेट बेयर से बातचीत की। उनसे सीधे पूछा गया कि क्या ईरान परमाणु बम हासिल करना चाहता है। इसके जवाब में पेजेशकियन ने कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं है।
उन्होंने कहा कि ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता ने कई बार धार्मिक आदेशों के जरिए बड़े पैमाने पर तबाही फैलाने वाले हथियारों को धार्मिक रूप से गलत और अवैध बताया था।
परमाणु कार्यक्रम की जांच कराने को तैयार ईरान
पेजेशकियन के बयान का अहम पहलू यह रहा कि उन्होंने केवल परमाणु हथियार बनाने से इनकार नहीं किया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सत्यापन के लिए भी दरवाजा खुला रखने की बात कही।
उन्होंने कहा कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों को पहुंच देने को तैयार है। साथ ही उन्होंने यूरेनियम को कम संवर्धित स्तर तक लाने की संभावना भी जताई।
ईरान का यूरेनियम संवर्धन लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय विवाद का विषय रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक ईरान ने यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया है, जबकि सामान्य नागरिक परमाणु ऊर्जा के लिए इस्तेमाल होने वाला संवर्धन स्तर इससे काफी कम होता है।
जून के समझौते को फिर आगे बढ़ाने का संकेत
पेजेशकियन ने अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुए समझौते का भी जिक्र किया। इस समझौते में दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव रोकने और आगे व्यापक समझौते की दिशा में बातचीत के लिए 60 दिनों की रूपरेखा तय की गई थी।
पेजेशकियन ने कहा कि ईरान उस समझौते को आगे बढ़ाने के लिए तैयार था। हालांकि, उनके मुताबिक अमेरिका ने बातचीत के बजाय सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपनाया और इससे कूटनीतिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
सितंबर की शुरुआत में भी पेजेशकियन ने कहा था कि अगर अमेरिका जून के अंतरिम समझौते में किए गए अपने दायित्वों को पूरा करता है तो ईरान भी जवाबी तौर पर अपनी प्रतिबद्धताएं लागू करने के लिए तैयार है।
अमेरिका पर युद्ध शुरू करने का आरोप
ईरानी राष्ट्रपति ने करीब सात महीने से जारी संघर्ष के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के रास्ते खुले रखने के बजाय अमेरिका ने ईरान पर हमला किया।
पेजेशकियन ने दावा किया कि इस दौरान ईरान के शीर्ष नेताओं, वैज्ञानिकों, सैन्य कमांडरों और सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाया गया। हालांकि, ये उनके द्वारा लगाए गए आरोप हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के बावजूद ईरान अपना विरोध जारी रखेगा। उन्होंने माना कि देश आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहा है, लेकिन कहा कि ईरान इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार है।
‘ईरान युद्ध नहीं चाहता’
पेजेशकियन ने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता और संघर्ष को खत्म करने के लिए अमेरिका को फैसला लेना होगा। उन्होंने इजराइल पर भी संघर्ष को भड़काने का आरोप लगाया।
अमेरिकी बेस पर हुए एक हमले में चीनी सैटेलाइट तस्वीरों के कथित इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर पेजेशकियन ने कहा कि उन्हें इस संबंध में सीधे तौर पर कोई जानकारी नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, उस हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई थी।