एसआईआर को लेकर एक नया विवाद सामने आ गया है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार देश भर में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के तहत 14 करोड़ से अधिक नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा चुके हैं और सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू यह है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के अलावा दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की तरफ से पिछले 10 महीनों में 14 बार कई मामलों में आपत्तियां जताई गईं।
क्या है इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का मुख्य खुलासा?
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और अन्य दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी के बीच तीखे मतभेद सामने आए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
इन आपत्तियों में एसआईआर (SIR), नए मतदाताओं के पंजीकरण, फॉर्म-6 (Form-6) में बदलाव और वोटर डेटा के केंद्रीकरण जैसे अतिसंवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। दोनों आयुक्तों का आरोप है कि कई कदम उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना उठाए गए। वहीं, दूसरी ओर चुनाव आयोग का पक्ष है कि एसआईआर समेत सभी फैसले आपसी सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए थे।
विपक्ष का हमला
इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार और चुनाव आयोग पर जोरदार हमले शुरू कर दिए हैं:
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट किया कि ‘वोट चोरी भारतीय जनता के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग, जिन्होंने इसे संगठित किया, उन्होंने देशद्रोह का कृत्य किया है। न्याय होकर रहेगा।’
तो समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताते हुए माननीय सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले का स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेने की मांग की है।
वहीं AAP ने कहा कि ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट से पता चलता है कि तीन में से दो चुनाव आयुक्तों ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्ति जताई थी। उन्होंने इन कदमों को अनाधिकृत और गैर-कानूनी बताया।
एसआईआर की यह प्रक्रिया पर पहले से ही विपक्ष सवाल उठा रहा था। अब इस रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग पर विपक्ष फिर हमलावर है।