नई दिल्ली: भाद्रपद शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन क्षीरसागर में योग निद्रा में भगवान विष्णु करवट बदलते हैं। इसी वजह से यह एकादशी श्रीहरि की पूजा के लिए विशेष मानी जाती है। इस साल परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर को मनाई जाएगी।
मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने और कुछ विशेष उपाय करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। धन से जुड़ी परेशानियों के लिए भी इस दिन कुछ उपाय बताए गए हैं।
चांदी के सिक्के से जुड़ा है ये उपाय
परिवर्तिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद चांदी का एक सिक्का श्रीहरि और मां लक्ष्मी को अर्पित करें। धार्मिक मान्यताओं में चांदी को शुभ और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है।
सिक्के पर लाल और पीले रंग का तिलक लगाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्तुति करें। पूजा पूरी होने के बाद सिक्के को साफ कपड़े में रखकर पर्स या धन रखने के स्थान पर रखा जा सकता है। मान्यता है कि इससे घर में बरकत बनी रहती है।
श्रीहरि को अर्पित करें पीले-गुलाबी फूल, तुलसी और पंचामृत
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में पीले और गुलाबी फूल चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके साथ पंचामृत और तुलसी दल भी अर्पित करें। धार्मिक मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को बेहद प्रिय है और उनकी पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है।
इस दिन माता लक्ष्मी की भी साथ में पूजा करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को श्रद्धा से फूल, पंचामृत और तुलसी अर्पित करने के बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें। मान्यता है कि इससे श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद बना रहता है।
जरूरतमंदों को दान करना भी माना जाता है शुभ
एकादशी पर व्रत और भगवान विष्णु की पूजा के साथ दान-पुण्य का भी विशेष महत्व बताया गया है। परिवर्तिनी एकादशी पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न, जल, वस्त्र, जूते या सोने के लिए जरूरी सामान दान किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता है कि जरूरतमंद की सहायता करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। दान करते समय दिखावे से बचने और सामने वाले की जरूरत को ध्यान में रखने की बात कही गई है। श्रद्धा से किया गया छोटा सहयोग भी इस दिन विशेष पुण्यदायी माना जाता है।
‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का करें जाप
परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित तिथि है। इसलिए इस दिन श्रीहरि के मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करें और शांत मन से ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
अपनी श्रद्धा के अनुसार मंत्र का जाप जितनी बार संभव हो किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि विष्णु नाम का स्मरण मन को शांति देता है और भक्त की प्रार्थना भगवान तक पहुंचती है। इस दिन विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु से जुड़े स्तोत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।
नारियल चढ़ाकर मां लक्ष्मी की भी करें पूजा
परिवर्तिनी एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को नारियल अर्पित करने की भी परंपरा है। सनातन मान्यता में नारियल को शुभ और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है।
पूजा के दौरान श्रीहरि को नारियल चढ़ाएं और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाकर उनकी स्तुति करें। मान्यता है कि जहां भगवान विष्णु की आराधना होती है, वहां माता लक्ष्मी का भी वास रहता है। इसलिए दोनों की एक साथ पूजा करने से घर में धन-धान्य और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।
परिवर्तिनी एकादशी पर श्रद्धा से किए गए इन उपायों को भगवान विष्णु की भक्ति और मां लक्ष्मी की आराधना से जोड़कर देखा जाता है।