मुंबई सीरियल बम धमाकों और बिल्डर प्रदीप जैन हत्याकांड सहित कई गंभीर मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे गैंगस्टर अबू सलेम की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। 2005 में भारत लाए गए सलेम ने रिहाई की मांग की। 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि वह 25 साल की सजा पूरी करने के बाद रिहाई की मांग कर सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक्शन के बाद अब सवाल यह है कि आश्वासन देने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने अबू सलेम की याचिका को क्यों खारिज कर दिया।
क्यों खारिज की सुप्रीम कोर्ट ने याचिका?
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गैंगस्टर अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की याचिका खारिज कर दी और बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि प्रत्यर्पण की शर्तों के मुताबिक सलेम की 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी, क्योंकि उसे 11 नवंबर 2005 को भारत लाया गया था।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जेल में अच्छे आचरण या सामान्य अर्जित छूट यानी रिमिशन के जरिए इस 25 साल की मूल अवधि को कम नहीं किया जा सकता। जजों ने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से की गई गणना के मुताबिक सलेम की सजा की निर्धारित अवधि अभी पूरी नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी।
पहले कितनी बार खारिज हुई सलेम की याचिका?
इससे पहले भी सलेम अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर अपनी रिहाई की कोशिश करता रहा है। इसी साल 16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने उसकी एक याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि नासिक जेल से मिले दस्तावेजों के आधार पर हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।
हाईकोर्ट को जल्द सुनवाई का निर्देश देने से भी सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया था। उस दौरान अदालत ने कहा था कि उसे टाडा के तहत सजा मिली है और यह मामला समाज का कोई भला करने से जुड़ा नहीं है।
यानी 25 साल की सजा पूरी होने का दावा करने वाले अबू सलेम को फिलहाल राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उसकी निर्धारित 25 साल की अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी और सामान्य रिमिशन से इसे कम नहीं किया जा सकता।