नई दिल्ली: चेक बाउंस मामले में अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें फिलहाल कम होती नहीं दिख रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से छूट पाने के लिए कोर्ट की रजिस्ट्री में पांच करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के 10 जुलाई के फैसले को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर मंगलवार को जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मौखिक सुनवाई के बाद सशर्त नोटिस जारी किया। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
हाईकोर्ट ने चेक बाउंस के सात मामलों में राजपाल यादव की दोषसिद्धि और तीन महीने की जेल की सजा बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए 10 सितंबर की अंतिम तारीख दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट के सामने उनकी याचिका पर सुनवाई के दौरान पांच करोड़ रुपये जमा करने की शर्त रखी गई है।
फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़ा है पूरा मामला
यह मामला फिल्म निर्माता-फाइनेंसर मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर सात शिकायतों से जुड़ा है। शिकायतें राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म प्रोडक्शन कंपनी के खिलाफ दर्ज कराई गई थीं।
मामला फिल्म ‘अता पता लापता’ के लिए जारी किए गए सात चेक के बाउंस होने के बाद सामने आया था। इसी मामले में राजपाल यादव को अदालत से राहत के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ रही है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बरकरार रखी थी दोषसिद्धि
इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने के कारावास की सजा सुनाई थी। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने दोषसिद्धि को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल करने में पांच साल से ज्यादा की देरी को ‘असाधारण’ मानते हुए माफ करने से इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट ने सातों शिकायतों में शिकायतकर्ता को एक-एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान करने का भी निर्देश दिया था। हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि राजपाल यादव पहले ही करीब दो करोड़ रुपये का भुगतान कर चुके हैं और इस रकम का समायोजन किया जाएगा।
कोर्ट के आश्वासन के बावजूद भुगतान से इनकार का जिक्र
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अपने 108 पृष्ठों के फैसले में कहा था कि राजपाल यादव शिकायतकर्ता मेसर्स मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को भुगतान करने के संबंध में अदालत को दिए गए आश्वासनों का बार-बार पालन करने में विफल रहे।
फैसले में कहा गया था कि अदालत ने मामले का सौहार्दपूर्ण समाधान कराने के लिए गंभीर प्रयास किए, लेकिन अभिनेता ने अंततः आगे कोई भुगतान करने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने उन्हें फैसले के खिलाफ अपीलीय अदालत का रुख करने के लिए दो महीने का समय भी दिया था।