काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच रसुवा जिले के त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में 100 से अधिक लोगों के फंसे होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। नेपाली सेना लगातार बचाव अभियान चला रही है। इस मुश्किल अभियान में भारत भी मदद के लिए अपनी विशेष सुरंग बचाव टीम भेज रहा है। इस टीम में ऐसे विशेषज्ञ शामिल हैं, जिन्हें बेहद चुनौतीपूर्ण सुरंग बचाव अभियानों का अनुभव है। यही वह टीम है, जिसने 2023 में उत्तराखंड के सिलक्यारा में 17 दिन तक चली जद्दोजहद के बाद सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी।
नेपाल में आई आपदा का असर काफी व्यापक है। अब तक 616 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की तरफ भी करीब 400 भारतीय फंसे हुए हैं, हालांकि सभी सुरक्षित हैं। भारत उनकी सुरक्षित वापसी के लिए चीन के साथ लगातार संपर्क में है।
रैट होल माइनिंग क्या है और कैसे काम करती है?
रैट होल यानी चूहे के बिल जैसी बेहद संकरी सुरंग। इस तकनीक में विशेषज्ञ बहुत छोटे रास्ते से अंदर पहुंचते हैं और कुदाल, फावड़े तथा बाल्टी जैसे पारंपरिक औजारों की मदद से मिट्टी और चट्टान को धीरे-धीरे हटाते हैं। निकाले गए मलबे को छोटे रास्ते से बाहर पहुंचाया जाता है।
सिलक्यारा बचाव अभियान के दौरान भी इसी तरह हाथों से खुदाई की गई थी। सेना के इंजीनियरों और रैट होल माइनर्स ने सुरंग के आखिरी हिस्से में मलबा हटाने का काम किया था। मजदूरों को एक धातु की पाइप के भीतर भेजकर चट्टान काटते हुए रास्ता बनाया गया था। अब नेपाल में भी इसी अनुभव का इस्तेमाल किया जाना है।
त्रिशूली 3A की सुरंग में फंसे हैं 100 से ज्यादा लोग
नेपाल के रसुवा जिले में स्थित त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में 100 से अधिक लोगों के फंसे होने की जानकारी है। बाढ़ ने इस इलाके में भारी तबाही मचाई है। हालात इतने मुश्किल हैं कि सुरंग के प्रवेश द्वार तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है।
बचाव अभियान के लिए नेपाली सेना ने दो हेलीकॉप्टर भी भेजे हैं। इनका इस्तेमाल सुरंग के भीतर फंसे लोगों का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के अभियान में किया जा रहा है। बाढ़ और मलबे के कारण सुरंग के प्रवेश मार्ग की पहचान करना भी मुश्किल हो रहा है।
सिलक्यारा में 17 दिन तक चली थी जिंदगी बचाने की जंग
भारत के पास हिमालयी इलाकों में कठिन सुरंग बचाव अभियानों का अनुभव है। 12 नवंबर 2023 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के सिलक्यारा में सुरंग का एक हिस्सा करीब 200 मीटर अंदर ढह गया था। इसके बाद मलबे के बीच 41 मजदूर फंस गए थे।
मजदूरों को बाहर निकालने के लिए कई स्तरों पर बचाव अभियान चलाया गया और करीब 17 दिनों तक लगातार कोशिशें होती रहीं। आखिरकार सेना, भारतीय इंजीनियरों और रैट होल माइनर्स की मदद से सभी 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।
अब इसी अनुभव के आधार पर भारत नेपाल के बचाव अभियान में अपनी विशेषज्ञ टीम भेज रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारतीय टीम मौके पर पहुंचकर हालात का आकलन करेगी और यह तय करेगी कि बचाव अभियान के लिए किन उपकरणों की जरूरत होगी।
नेपाल पहुंची भारत की तीसरी खेप, मेडिकल टीम भी साथ
भारत नेपाल में चल रहे राहत और बचाव प्रयासों में लगातार मदद पहुंचा रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत से राहत सामग्री लेकर तीसरी उड़ान काठमांडू पहुंच चुकी है।
इस खेप के साथ 11 सदस्यीय चिकित्सा दल और सुरंग बचाव दल भी नेपाल पहुंचा है। भारत की ओर से भेजी गई इस तीसरी खेप में 10 टन राहत सामग्री शामिल है। भारतीय चिकित्सा दल भी काठमांडू पहुंच चुका है और अब सुरंग बचाव टीम स्थानीय स्थिति का आकलन कर आगे की कार्रवाई के लिए जरूरी तैयारियां करेगी।