नई दिल्ली: कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल का रसुवा मार्ग इस साल तीर्थयात्रियों के बीच खासा लोकप्रिय रहा है। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, 2026 में रिकॉर्ड 13,523 तीर्थयात्रियों ने कैलाश मानसरोवर जाने के लिए रसुवा रूट का इस्तेमाल किया। बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद रसुवागढ़ी सीमा चौकी के आसपास बड़ी संख्या में पर्यटक और तीर्थयात्री फंस गए। इनमें कैलाश मानसरोवर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी काफी है।
रसुवा मार्ग से कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों में अनिवासी भारतीय और विदेशी नागरिकों की संख्या भी बढ़ रही है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय की ओर से संचालित आधिकारिक कैलाश मानसरोवर यात्रा केवल भारतीय नागरिकों के लिए होती है। इसमें पहले से पंजीकरण, चयन और जांच की प्रक्रिया शामिल होती है। यही वजह है कि सीमित सीटों के कारण कई लोग नेपाल के निजी ऑपरेटरों के जरिए यात्रा का विकल्प चुनते हैं।
रसुवा रूट क्यों बन रहा तीर्थयात्रियों की पसंद
कैलाश मानसरोवर जाने के लिए नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों द्वारा मुख्य रूप से दो मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है। इनमें एक रसुवा होकर जाता है, जबकि दूसरा हिल्सा मार्ग है। तीर्थयात्री महंगे हुमला मार्ग की तुलना में रसुवा रूट को अधिक पसंद कर रहे हैं।
रसुवा मार्ग से यात्रा आमतौर पर काठमांडू से शुरू होती है। सड़क के रास्ते इस यात्रा को पूरा करने में करीब 10 से 14 दिन लगते हैं। दूसरे विकल्प में नेपालगंज और सिमिकोट होते हुए हेलीकॉप्टर से हिल्सा पहुंचा जाता है। इस मार्ग से पूरी यात्रा करीब 5 से 11 दिन में पूरी हो सकती है।
भारत सरकार की आधिकारिक यात्रा का रास्ता अलग
भारत का विदेश मंत्रालय कैलाश मानसरोवर यात्रा को दो आधिकारिक मार्गों से संचालित करता है। उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जाने वाली यात्रा में करीब 21 से 22 दिन लगते हैं। वहीं, सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर जाने वाले मार्ग में 20 दिन से अधिक समय लगता है।
विदेश मंत्रालय हर साल करीब एक हजार तीर्थयात्रियों को इन आधिकारिक मार्गों से कैलाश मानसरोवर भेजता है। यात्रियों का चयन कंप्यूटर आधारित लॉटरी प्रणाली के जरिए किया जाता है। इन मार्गों से यात्रा करने पर प्रति व्यक्ति करीब दो लाख रुपये का खर्च आता है।
सीमित संख्या के कारण निजी यात्रा का बढ़ा चलन
सरकारी यात्रा में यात्रियों की संख्या सीमित होने और चयन के लिए लॉटरी व्यवस्था होने के कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु नेपाल के रास्ते निजी ऑपरेटरों की सेवाएं लेते हैं। निजी यात्राओं में यात्रियों की संख्या पर ऐसी सीमा नहीं होती और लॉटरी के जरिए चयन की जरूरत भी नहीं पड़ती।
नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर जाने वाले यात्रियों के लिए रसुवा और हिल्सा सबसे प्रमुख मार्गों में शामिल हैं। इनमें रसुवा मार्ग सड़क संपर्क के कारण कई यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प बन गया है।
यात्रा के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत
एक यात्रा एजेंट के अनुसार, मई से सितंबर के बीच इन मार्गों पर जाने वाले यात्रियों के लिए वैध पासपोर्ट और आवश्यक चीनी परमिट की जरूरत होती है। इसमें चीनी समूह वीजा और तिब्बत यात्रा परमिट शामिल हैं।
काठमांडू से शुरू होने वाली निजी कैलाश मानसरोवर यात्रा का खर्च तीन लाख रुपये से अधिक हो सकता है। कुल लागत इस बात पर निर्भर करती है कि यात्री यात्रा के दौरान किस तरह की सुविधाएं और सेवाएं लेते हैं।