TMC के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब लोकसभा सचिवालय ने भी इन सांसदों को नोटिस भेजकर सात दिन में जवाब मांगा है। मामला दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ा है।
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों के खिलाफ चल रही अयोग्यता की कार्रवाई ने अब नया मोड़ ले लिया है। 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इन सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद लोकसभा सचिवालय ने भी सभी संबंधित सांसदों को नोटिस भेजकर सात दिनों के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा है।
यह पूरा मामला TMC महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके टिकट और चुनाव चिह्न पर लोकसभा चुनाव जीतने वाले इन सांसदों ने बाद में दूसरी राजनीतिक पार्टी NCPI का रुख किया।
लोकसभा स्पीकर के पास लंबित था मामला
TMC की ओर से इन सांसदों के खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता की मांग की गई थी। याचिकाओं पर फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष लंबित था।
TMC ने आरोप लगाया कि अयोग्यता की याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी हो रही है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद बढ़ी हलचल
25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने 20 सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। अब लोकसभा सचिवालय की ओर से भी नोटिस जारी होने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना जवाब देना होगा। इसके बाद उनके जवाब और मामले से जुड़े तथ्यों के आधार पर आगे की संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
क्या जा सकती है सांसदों की सदस्यता?
अगर जांच और संवैधानिक प्रक्रिया में यह साबित होता है कि संबंधित सांसदों का कदम दलबदल विरोधी कानून के तहत आता है, तो उनकी लोकसभा सदस्यता पर संकट खड़ा हो सकता है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी 20 सांसदों की सदस्यता निश्चित रूप से जाएगी।
मामले में अंतिम फैसला संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
परिसीमन को लेकर भी बढ़ सकती है सियासी अहमियत
इन 20 सांसदों की सदस्यता को लेकर चल रही कार्रवाई ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब परिसीमन से जुड़े प्रस्तावित विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान जारी है।
अगर किसी भी स्तर पर इन सांसदों की सदस्यता प्रभावित होती है, तो इसका असर संसद के समीकरणों के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
Meta Description: TMC के 20 बागी सांसदों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद लोकसभा सचिवालय ने भी सात दिन में जवाब मांगा है। मामला दलबदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग से जुड़ा है।