मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। इसी बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता दिनेश सालवी ने मुंबई के कांदिवली इलाके में गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा चालकों को लेकर विवादित बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर किसी चालक को मराठी सीखने या बोलने में परेशानी है तो वह महाराष्ट्र छोड़कर अपने राज्य वापस जा सकता है। यह बयान कांदिवली में एक मराठी भाषी ऑटो चालक के साथ मारपीट की घटना के बाद सामने आया है।
कांदिवली में MNS ने लगाए बोर्ड, दी कड़ी चेतावनी
राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने कांदिवली के चारकोप विधानसभा क्षेत्र में कई जगह बोर्ड लगाए हैं। MNS नेता दिनेश सालवी ने राज्य सरकार के मराठी भाषा संबंधी नियम का समर्थन करते हुए कहा कि जो ऑटो-रिक्शा चालक मराठी सीखने या बोलने में परेशानी महसूस करते हैं, वे महाराष्ट्र छोड़कर अपने-अपने राज्यों में लौट सकते हैं।
सालवी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर मुंबई के लोगों को मजबूर किया गया तो MNS चुप नहीं बैठेगी। उनके बयान के बाद भाषा को लेकर चल रहा विवाद और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
मराठी भाषी चालक से मारपीट के बाद बढ़ा तनाव
MNS नेता की यह टिप्पणी कांदिवली में चार ऑटो-रिक्शा चालकों द्वारा एक मराठी भाषी चालक के साथ मारपीट की घटना के बाद आई है। इस घटना के बाद मराठी भाषी लोगों और उत्तर भारत से आए ऑटो-टैक्सी चालकों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई।
विरोध में एमजी रोड पर जुटे थे ऑटो चालक
सोमवार को बड़ी संख्या में ऑटो-रिक्शा चालक मराठी भाषा से जुड़े महाराष्ट्र सरकार के नियम के विरोध में एमजी रोड पर इकट्ठा हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कुछ चालक दूसरे ऑटो चालकों से भी अपने वाहन नहीं चलाने की अपील कर रहे थे।
20 अगस्त से पूरे महाराष्ट्र में चल रहा अभियान
महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने 20 अगस्त से पूरे राज्य में अभियान शुरू किया है। इसके तहत गैर-मराठी टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों के मराठी भाषा के कामचलाऊ ज्ञान की जांच की जा रही है।
इस बीच कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की ओर से चलाए गए 105 दिवसीय ‘हिंदूहृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ में 1,65,601 गैर-मराठी भाषी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक मराठी सीखने के लिए आगे आए हैं।
1989 से नियम लागू, लेकिन अब तक नहीं हुई सख्ती
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने पिछले सप्ताह कहा था कि महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए व्यावहारिक मराठी भाषा का ज्ञान वर्ष 1989 से ही जरूरी है। हालांकि, अब तक इस नियम को सख्ती से लागू नहीं किया गया था।