नई दिल्ली: फर्जी और अवैध लोन ऐप्स के खिलाफ सरकार ने एक और बड़ी कार्रवाई की है। गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट की पहचान के बाद गूगल ने तीन खतरनाक लोन ऐप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया है। इन ऐप्स पर तुरंत लोन देने का झांसा देकर यूजर्स के फोन से संवेदनशील निजी जानकारी हासिल करने और बाद में उसका गलत इस्तेमाल करने का आरोप है।
I4C की जांच के बाद गूगल ने लिया एक्शन
I4C की थ्रेट एनालिटिक्स यूनिट ने प्ले स्टोर पर सक्रिय इन तीन ऐप्स की पहचान की थी। इसके बाद गूगल को इन्हें हटाने या ब्लॉक करने के लिए नोटिस भेजा गया। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) के तहत जारी इस नोटिस के करीब तीन घंटे के भीतर गूगल ने तीनों ऐप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया।
इन 3 लोन ऐप्स पर लगा डेटा चोरी का आरोप
जांच में जिन ऐप्स को खतरनाक पाया गया, उनके नाम होराइजन कैश सर्विस, मनी स्कोर मॉनिटर और जेलिक्रेडिट हैं। ये ऐप्स कम ब्याज और बिना कागजी कार्रवाई के तुरंत लोन देने का दावा करते थे।
आरोप है कि ऐप डाउनलोड करने के बाद यूजर्स से भारी ब्याज वसूला जाता था। इसके साथ ही कर्ज लेने वालों पर मानसिक दबाव बनाने और उन्हें परेशान करने की शिकायतें भी सामने आईं।
आधार, बैंक डिटेल से लेकर फोटो तक पर थी नजर
I4C की जांच के मुताबिक, इन ऐप्स के जरिए यूजर्स के फोन से निजी और संवेदनशील जानकारी हासिल की जा रही थी। इसमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी, पहचान पत्र का विवरण, बैंक खाते की जानकारी, संपर्क सूची और फोटो गैलरी शामिल थी। ऐप्स पर कैमरे तक पहुंच हासिल करने का भी आरोप है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, चोरी की गई इस जानकारी का इस्तेमाल यूजर्स को डराने-धमकाने, ब्लैकमेल करने और उनसे मनमानी रकम वसूलने के लिए किया जाता था।
गूगल के विज्ञापनों से लोगों तक पहुंच रहे थे ऐप्स
इन ऐप्स का प्रसार डिजिटल विज्ञापनों के जरिए किया जा रहा था। आकर्षक लोन ऑफर देखकर लोग इन्हें वैध और सुरक्षित समझकर डाउनलोड कर लेते थे। जांच में यह भी सामने आया कि इसके पीछे काम करने वाला साइबर अपराध नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय था और भारतीय यूजर्स को निशाना बना रहा था।
अगस्त में दूसरी बार हुई बड़ी कार्रवाई
I4C की ओर से अगस्त में गूगल को भेजा गया यह दूसरा नोटिस है। इससे पहले 7 अगस्त को छह अन्य फर्जी लोन ऐप्स के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इनमें लोनऑर्बिट, हिसाब, नेक्सस लोन, वन फंड, क्रेडिट फैक्टर और मोबाइल क्रेडिट प्रेयरी शामिल थे।
इन ऐप्स पर भी कम ब्याज पर तुरंत कर्ज देने का झांसा देकर लोगों का डेटा हासिल करने और बाद में अत्यधिक ब्याज वसूलने के आरोप थे।
फर्जी लोन ऐप्स से आगे भी बढ़ी साइबर एजेंसियों की नजर
सरकारी एजेंसियों की निगरानी अब सिर्फ फर्जी लोन ऐप्स तक सीमित नहीं है। इसी महीने I4C ने गूगल के फायरबेस मंच पर संचालित कई संदिग्ध वेबसाइटों और डेटाबेस के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए नोटिस जारी किए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, नुकसान पहुंचाने वाले सॉफ्टवेयर फैलाने और वित्तीय जानकारी चोरी करने के आरोप में 57 से अधिक फायरबेस वेबसाइटों पर कार्रवाई की गई।
ऑनलाइन लोन लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन कर्ज लेने के लिए हमेशा आरबीआई से पंजीकृत बैंक या एनबीएफसी के आधिकारिक ऐप का इस्तेमाल करें। किसी अनजान लोन ऐप को फोन की फोटो गैलरी, संपर्क सूची या कैमरे का अनावश्यक अधिकार न दें।
अगर कोई ऐप लोन देने के बदले जरूरत से ज्यादा निजी जानकारी या फोन के कई हिस्सों तक पहुंच मांगता है, तो उसे डाउनलोड करने से बचें। पहले से डाउनलोड किए गए किसी संदिग्ध ऐप को तुरंत हटा देना भी जरूरी है।