न्यूयार्क:अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीय IT और टेक प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खबर है। ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा को लेकर ऐसा प्रस्ताव रखा है, जो लागू होने पर विदेशी कर्मचारियों के लिए अमेरिका में नौकरी का रास्ता बेहद महंगा कर सकता है। प्रस्ताव में हर नए H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर यानी करीब 98 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस का प्रावधान है।
H-1B वीजा के लिए अब देनी पड़ सकती है 98 लाख की फीस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने सोमवार, 24 अगस्त को H-1B वीजा से जुड़ा नया प्रस्ताव जारी किया। इसके तहत विदेशी कर्मचारियों के लिए हर वीजा पर 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस लगाने का प्रस्ताव है। मौजूदा व्यवस्था की तुलना में यह रकम कई गुना ज्यादा है। पहले H-1B वीजा के लिए अलग-अलग मामलों में आम तौर पर करीब 2,000 से 5,000 डॉलर तक फीस लगती थी।
H-1B वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां विदेशों से उच्च कौशल वाले पेशेवरों को अस्थायी तौर पर नौकरी पर रखती हैं। इसका इस्तेमाल खास तौर पर IT, टेक्नोलॉजी, रिसर्च, फाइनेंस और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में होता है।
कब लागू हो सकता है नया नियम?
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने यह प्रस्ताव 24 अगस्त को फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित किया है। प्रस्ताव पर 30 दिनों तक लोगों से राय ली जाएगी। इसके बाद विभाग इसे अंतिम रूप दे सकता है। ऐसे में साल के अंत तक नया नियम लागू होने की संभावना जताई जा रही है।
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो H-1B वीजा लेने वाले विदेशी कर्मचारियों और उन्हें नौकरी देने वाली अमेरिकी कंपनियों पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
1 लाख डॉलर की फीस को स्थायी बनाने की तैयारी
प्रस्तावित 1,03,265 डॉलर की फीस का संबंध ट्रंप प्रशासन के 2025 के उस आदेश से भी है, जिसमें कुछ नए H-1B आवेदनों के लिए 1 लाख डॉलर के भुगतान की व्यवस्था की गई थी। यह आदेश सितंबर में समाप्त होने वाला है। हालांकि, इसके तहत DHS को ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया गया था, जिससे इस तरह के भुगतान को स्थायी बनाया जा सके।
इस फीस को लेकर अमेरिका में कानूनी विवाद भी चल रहा है। 8 जून 2026 को मैसाचुसेट्स की अमेरिकी जिला अदालत ने 1 लाख डॉलर के भुगतान की शर्त लागू करने वाली एजेंसी की गाइडलाइन को रद्द कर दिया था। DHS ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन 24 जुलाई को फर्स्ट सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने सरकार की मांग खारिज कर दी।
भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्यों पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। लंबे समय से भारतीय इंजीनियर, IT कर्मचारी, शोधकर्ता, वित्तीय विशेषज्ञ और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स इस वीजा के जरिए अमेरिका में काम करते रहे हैं।
नई फीस लागू होने पर इसका असर भारतीय IT कंपनियों और अमेरिका में नौकरी तलाशने वाले भारतीय प्रोफेशनल्स दोनों पर पड़ सकता है। खासकर उन कंपनियों के लिए कर्मचारियों को अमेरिका भेजना महंगा हो सकता है, जिनका कारोबार अमेरिकी क्लाइंट्स की साइट पर कर्मचारियों की तैनाती पर निर्भर है।
H-1B चयन में सैलरी का भी बढ़ेगा महत्व
H-1B व्यवस्था में वेतन के आधार पर चयन को भी ज्यादा महत्व देने की दिशा में बदलाव किए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 के H-1B कैप सीजन में वरिष्ठ स्तर के लेवल III उम्मीदवारों की चयन दर 68 प्रतिशत रही, जबकि एंट्री-लेवल लेवल I उम्मीदवारों के लिए यह 40 प्रतिशत थी।
इस बदलाव का असर खास तौर पर उन भारतीय छात्रों और शुरुआती करियर वाले प्रोफेशनल्स पर पड़ सकता है, जो अमेरिका में नौकरी के लिए H-1B वीजा पर निर्भर रहते हैं।
नए बिल से और कड़े हो सकते हैं नियम
H-1B व्यवस्था को लेकर प्रस्तावित ‘End H-1B Visa Abuse Act of 2026’ भी चर्चा में है। अगर यह बिल कानून बनता है तो H-1B कार्यक्रम पर और सख्ती हो सकती है। इसमें नए H-1B वीजा पर तीन साल की रोक, सालाना H-1B कैप को 65 हजार से घटाकर 25 हजार करने और H-1B कर्मचारियों के लिए 2 लाख डॉलर सालाना न्यूनतम वेतन तय करने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं।