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Reading: ड्राइविंग के दौरान झपकी आई तो खुद हिलेगी कार की सीट! IIT मद्रास की ‘इंटेलिसीट’ ऐसे पकड़ेगी ड्राइवर की थकान और बचाएगी जान
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ड्राइविंग के दौरान झपकी आई तो खुद हिलेगी कार की सीट! IIT मद्रास की ‘इंटेलिसीट’ ऐसे पकड़ेगी ड्राइवर की थकान और बचाएगी जान

vineet verma
Last updated: August 23, 2026 11:53 am
vineet verma
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चेन्नई: हाईवे पर लंबी दूरी की ड्राइविंग के दौरान कुछ सेकंड की झपकी भी जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर रात में लगातार वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के लिए थकान और नींद बड़ा खतरा बन जाती है। इसी समस्या से निपटने के लिए IIT मद्रास के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी स्मार्ट सीट विकसित की है, जो ड्राइवर के शरीर में थकान से जुड़े बदलावों को पहचानकर समय रहते चेतावनी देती है।

Contents
सामान्य कार सीट जैसी दिखती है, लेकिन अंदर लगे हैं सेंसरबिना कैमरे और शरीर पर तार लगाए कैसे करती है काम?थकान बढ़ते ही तीन स्तर पर मिलेगा अलर्टपुरानी कार, बस और ट्रक में भी लगाई जा सकेगी

रिहैबिलिटेशन बायोइंजीनियरिंग समूह ने सीट बनाने वाली कंपनी हरिता के साथ मिलकर इस तकनीक को तैयार किया है। इसे ‘इंटेलिसीट’ नाम दिया गया है। खास बात यह है कि यह सीट ड्राइवर पर नजर रखने के लिए कैमरे, सिर पर लगाए जाने वाले उपकरण या शरीर से जुड़े तारों पर निर्भर नहीं है।

सामान्य कार सीट जैसी दिखती है, लेकिन अंदर लगे हैं सेंसर

इंटेलिसीट देखने में सामान्य वाहन सीट जैसी ही दिखाई देती है, लेकिन इसके बैकरेस्ट और सीट के आधार वाले हिस्से में विशेष सेंसर लगाए गए हैं। ये सेंसर ड्राइवर के बैठने के तरीके, शरीर की स्थिति और थकान के कारण होने वाली हल्की गतिविधियों में बदलाव को महसूस करते हैं।

इस तकनीक का उद्देश्य ड्राइवर के पूरी तरह सो जाने का इंतजार करना नहीं, बल्कि नींद या अत्यधिक थकान की स्थिति आने से पहले संकेत पहचानना है। इससे ड्राइवर को समय रहते सतर्क किया जा सकता है।

बिना कैमरे और शरीर पर तार लगाए कैसे करती है काम?

बाजार में मौजूद कुछ चालक निगरानी प्रणालियों में कैमरे या शरीर से जुड़े इलेक्ट्रोड का इस्तेमाल किया जाता है। इसके विपरीत इंटेलिसीट को गैर-हस्तक्षेपी तरीके से काम करने के लिए तैयार किया गया है। यानी ड्राइवर को शरीर पर कोई उपकरण पहनने की जरूरत नहीं पड़ती।

सीट में लगे सेंसर शरीर की स्थिति और हलचल से जुड़े संकेतों को रिकॉर्ड करते हैं। इसके अलावा सतहीय इलेक्ट्रोमायोग्राफी तकनीक के जरिए मांसपेशियों से निकलने वाले हल्के विद्युत संकेतों को समझने की कोशिश की जाती है। इससे पीठ और कंधों की मांसपेशियों में थकान के संकेतों का पता लगाने में मदद मिलती है।

थकान बढ़ते ही तीन स्तर पर मिलेगा अलर्ट

इंटेलिसीट ड्राइवर की थकान को तीन स्तरों में पहचानकर अलग-अलग चेतावनी देती है।

हल्की थकान महसूस होने पर डैशबोर्ड पर एक संकेतक रोशनी जलती है, जिससे ड्राइवर को सतर्क किया जाता है।

अगर थकान बढ़ती है तो रोशनी के साथ ध्वनि संकेत भी मिलता है। इससे ड्राइवर को अपनी स्थिति के प्रति और ज्यादा सावधान होने का संकेत मिलता है।

जब थकान खतरनाक स्तर तक पहुंचती है, तो सीट खुद कंपन करने लगती है। इसके साथ ही वाहन मालिक के मोबाइल ऐप पर भी तुरंत सूचना भेजी जाती है।

पुरानी कार, बस और ट्रक में भी लगाई जा सकेगी

इंटेलिसीट को केवल नई गाड़ियों के लिए तैयार नहीं किया गया है। इसे मौजूदा कार, बस और ट्रक में भी लगाया जा सकता है। इसके लिए वाहन में बड़े तकनीकी बदलाव की जरूरत नहीं पड़ने की बात कही गई है।

सीट लगाने के बाद वाहन की चाबी चालू करते ही इसकी निगरानी प्रणाली काम करना शुरू कर देती है। यह मोबाइल ऐप के जरिए वास्तविक समय का डाटा भी भेज सकती है।

ड्राइवर की थकान और नींद से जुड़े सड़क हादसों को कम करने के लिहाज से यह स्वदेशी इंटरनेट आधारित तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है, खासकर लंबी दूरी के परिवहन में जहां ड्राइवरों को लगातार कई घंटे वाहन चलाना पड़ता है।

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