मुंबई: आमतौर पर विदेश में बसने की बात हो तो फिनलैंड जैसे देश का नाम सुनकर लोग बेहतर जिंदगी, सुरक्षा और सुविधाओं की कल्पना करते हैं। लेकिन एक फिनिश परिवार ने इसके बिल्कुल उलट फैसला लिया है। आरामदायक जिंदगी छोड़कर यह परिवार हजारों किलोमीटर दूर मुंबई आ बसा है। इसके पीछे वजह छुट्टियां मनाना या कुछ समय के लिए भारत घूमना नहीं, बल्कि अपने बच्चों को जिंदगी का एक बिल्कुल अलग अनुभव देना है।
सोशल मीडिया पर यह परिवार ‘द फिनडियन फैमिली’ के नाम से जाना जाता है। परिवार के सदस्य टोको शिक्षक और कंटेंट क्रिएटर हैं। वह अपनी पत्नी जानिका तूनेनैन और बच्चों के साथ मुंबई में नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। उनके इस फैसले की कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोग हैरान हैं कि आखिर फिनलैंड जैसी सुविधाजनक जगह छोड़कर उन्होंने मुंबई को ही क्यों चुना।
बच्चों को सिर्फ आराम वाली जिंदगी नहीं देना चाहते
टोको ने भारत आने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि फिनलैंड में उनका परिवार अच्छी और आरामदायक जिंदगी जी रहा था। वहां उन्हें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा था। सुरक्षित माहौल और जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध थीं।
इसके बावजूद टोको और उनकी पत्नी को लगा कि बच्चों के लिए केवल आरामदायक माहौल में बड़ा होना पर्याप्त नहीं है। वे चाहते हैं कि उनके बच्चे अलग-अलग लोगों से मिलें, दूसरी संस्कृतियों को करीब से समझें और दुनिया को सिर्फ एक ही नजरिए से न देखें।
उनका मानना है कि बच्चों को अलग समाज और संस्कृति का अनुभव कराने से उनकी सोच ज्यादा व्यापक हो सकती है। इसी विचार ने परिवार को भारत आने का फैसला लेने के लिए प्रेरित किया।
मुंबई ही क्यों बनी नए सफर की मंजिल?
भारत आने के बाद परिवार ने मुंबई को अपना नया ठिकाना बनाया। जुलाई के आखिरी सप्ताह में वे मुंबई पहुंचे। शहर में पहुंचते ही उन्हें मुंबई की बारिश का भी अनुभव हुआ।
जहां मुंबई की तेज बारिश कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती है, वहीं इस परिवार ने इसे अपने नए सफर का हिस्सा माना। भारत पहुंचने के बाद परिवार ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी साझा करते हुए लोगों को नमस्ते कहा और नई जगह को जानने-समझने के इस अनुभव को लेकर उत्साह जताया।
फिनलैंड की शांत जिंदगी से बिल्कुल अलग है मुंबई
फिनलैंड और मुंबई की जिंदगी में बड़ा अंतर है। फिनलैंड शांत माहौल, कम आबादी वाले इलाकों और व्यवस्थित जीवन के लिए जाना जाता है। दूसरी तरफ मुंबई की पहचान लगातार भागते-दौड़ते महानगर के तौर पर है।
मुंबई की भीड़, लोकल ट्रेन, बाजारों की आवाजें, ट्रैफिक, बारिश, अलग-अलग भाषाएं और विविध खान-पान इस परिवार के लिए बिल्कुल नया अनुभव हैं। बच्चों के लिए भी यह केवल देश बदलने का मामला नहीं है। उन्हें एक अलग समाज, संस्कृति, भाषा, मौसम और जीवनशैली के बीच रहने का मौका मिल रहा है।
टोको और जानिका का मानना है कि बच्चों को दुनिया समझाने के लिए केवल किताबों तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं है। अलग-अलग जगहों पर रहना और अलग पृष्ठभूमि के लोगों के साथ समय बिताना भी उनके अनुभव को व्यापक बना सकता है।
मुंबई पहुंचते ही सोशल मीडिया पर हुआ जोरदार स्वागत
परिवार ने जैसे ही मुंबई पहुंचने के वीडियो साझा किए, सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान उनकी ओर गया। बड़ी संख्या में भारतीय यूजर्स ने उनका स्वागत किया। कई लोगों ने मुंबई में परिवार का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं।
कुछ यूजर्स ने परिवार के फैसले की तारीफ करते हुए कहा कि अलग संस्कृति के बीच बच्चों की परवरिश उन्हें दुनिया को बेहतर तरीके से समझने में मदद कर सकती है। वहीं, कुछ लोगों के लिए यह बात हैरान करने वाली रही कि जिस फिनलैंड में दुनिया के कई लोग बसने का सपना देखते हैं, वहां का एक परिवार भारत में नई जिंदगी शुरू करने पहुंच गया।
बच्चों के लिए सिर्फ जगह नहीं, पूरी दुनिया बदलने का अनुभव
टोको और जानिका का फैसला सिर्फ फिनलैंड छोड़कर भारत आने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बच्चों को अलग तरह की जिंदगी और नए अनुभव देने की सोच है। परिवार चाहता है कि बच्चे मुंबई में रहते हुए भारतीय स्कूल, खाना, स्थानीय त्योहार, भाषा और यहां के लोगों के साथ घुलने-मिलने का अनुभव हासिल करें।
हर परिवार के लिए अच्छी जिंदगी की परिभाषा अलग हो सकती है। किसी के लिए शांति और सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है, तो किसी के लिए नए अनुभव और अलग संस्कृतियों को समझना ज्यादा मायने रखता है। इस परिवार ने अपने बच्चों के लिए दूसरा रास्ता चुना है और इसी वजह से फिनलैंड की सुविधाजनक जिंदगी छोड़कर मुंबई आना चर्चा में है।