नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी लंबे संघर्ष के बीच अमेरिकी नौसेना अपने परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को वापस बुला रही है। करीब 266 दिनों की तैनाती के बाद इसकी जगह यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को भेजा जा रहा है। यूएसएस अब्राहम लिंकन पर करीब 5,000 सैन्यकर्मी तैनात हैं और इसकी लंबी तैनाती को लेकर अमेरिकी सैन्यकर्मियों के परिवारों तथा सांसदों ने चिंता भी जताई है। ऐसे में यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन की क्षमता और अमेरिकी नौसेना के विमानवाहक पोतों की ताकत चर्चा में है।
266 दिनों की तैनाती के बाद लौट रहा यूएसएस अब्राहम लिंकन
यूएसएस अब्राहम लिंकन लगभग नौ महीने से समुद्र में तैनात है। रिपोर्टों के मुताबिक, वियतनाम युद्ध के बाद यह अमेरिकी नौसेना के किसी युद्धपोत की सबसे लंबी तैनाती में से एक है। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने के कारण जहाज के चालक दल के मानसिक स्वास्थ्य और सुविधाओं को लेकर अमेरिकी सैन्यकर्मियों के परिवारों तथा सांसदों ने चिंता जताई है।
कुछ रिपोर्टों में जहाज पर तैनात नौसैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं और समुद्र में छलांग लगाने की कोशिशों के दावे भी सामने आए। हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएसएस अब्राहम लिंकन की स्थिति को लेकर सामने आई चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि जहाज ठीक है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने भी कुछ रिपोर्टों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए जाने की बात कही है।
अमेरिका के पास 11 सक्रिय एयरक्राफ्ट कैरियर
अमेरिकी नौसेना के पास वर्तमान में 11 सक्रिय एयरक्राफ्ट कैरियर हैं। ये सभी परमाणु ऊर्जा से संचालित हैं और निमिट्ज श्रेणी या नई फोर्ड श्रेणी से संबंधित हैं।
ये दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोतों में शामिल हैं। प्रत्येक विमानवाहक पोत करीब 80 लड़ाकू विमानों को ले जाने में सक्षम है। इन जहाजों की ताकत सिर्फ उनके आकार और विमानों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, अनुभवी नौसैनिकों और एकीकृत सहायता प्रणालियों का संयोजन इन्हें बेहद प्रभावशाली बनाता है।
अमेरिका के पास 9 एम्फिबियस असॉल्ट शिप भी
विमानवाहक पोतों के अलावा अमेरिकी नौसेना के पास नौ एम्फिबियस असॉल्ट शिप भी हैं। इन्हें कई बार गलती से एयरक्राफ्ट कैरियर की श्रेणी में गिना जाता है, जबकि इनका इस्तेमाल अलग तरह के सैन्य अभियानों के लिए किया जाता है।
अमेरिकी विमानवाहक पोत सैन्य अभियानों के साथ-साथ वैश्विक सुरक्षा और कूटनीति में भी अहम भूमिका निभाते हैं। सहयोगी देशों की मदद और विभिन्न क्षेत्रों में स्थिरता बनाए रखने के अलावा प्राकृतिक आपदाओं तथा अन्य संकटों के समय इनका इस्तेमाल मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए भी किया जा सकता है।
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन कितना ताकतवर है?
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन अमेरिकी नौसेना का निमिट्ज श्रेणी का परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत है। इसका क्रमांक CVN-73 है। इसे 4 जुलाई 1992 को अमेरिकी नौसेना में शामिल किया गया था। इसका नाम अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वाशिंगटन के नाम पर रखा गया है।
यह निमिट्ज श्रेणी का छठा विमानवाहक पोत है। इसका विस्थापन करीब 97,000 टन है और लंबाई 1,092 फीट यानी करीब 333 मीटर है। इसकी लंबाई लगभग तीन फुटबॉल मैदानों के बराबर बताई जाती है।
दो परमाणु रिएक्टर देते हैं जबरदस्त ताकत
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन दो वेस्टिंगहाउस ए4डब्ल्यू परमाणु रिएक्टरों से संचालित होता है। परमाणु ऊर्जा की वजह से इसे लंबे समय तक ईंधन भरने की जरूरत नहीं पड़ती। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इसके परमाणु ईंधन की क्षमता इसे करीब 20 से 25 वर्षों तक संचालन में सक्षम बनाती है।
इस विमानवाहक पोत की अधिकतम गति 30 नॉट यानी करीब 56 किलोमीटर प्रति घंटा से अधिक है। समुद्र में इतने विशाल आकार के बावजूद इसकी गति और लगातार लंबे समय तक अभियान चलाने की क्षमता इसे अमेरिकी नौसेना की महत्वपूर्ण परिसंपत्ति बनाती है।
एक साथ 85 से ज्यादा विमान और हेलीकॉप्टर
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन पर एक समय में 85 से ज्यादा लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं। इसके विमान बेड़े में एफ/ए-18ई/एफ सुपर हॉर्नेट और एफ-35सी लाइटनिंग II जैसे लड़ाकू विमान शामिल हो सकते हैं।
जहाज पर करीब 3,200 नौसैनिक और विमानन विंग के लगभग 2,400 कर्मचारी तैनात रहते हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 5,600 लोग इस विशाल युद्धपोत पर एक साथ मौजूद रह सकते हैं।
चीन और उत्तर कोरिया पर नजर रखने के लिए जापान में रहा तैनात
यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को 2008 से 2015 के बीच जापान के योकोसुका में स्थायी रूप से तैनात किया गया था। यह जापान में स्थायी रूप से तैनात होने वाला पहला परमाणु-संचालित अमेरिकी विमानवाहक पोत था। यहां से इसकी भूमिका प्रशांत क्षेत्र में चीन और उत्तर कोरिया पर नजर रखने के साथ जुड़ी रही।
2017 में इसे वर्जीनिया भेजा गया, जहां इसके रिफ्यूलिंग और कॉम्प्लेक्स ओवरहॉल का काम हुआ। इस प्रक्रिया के दौरान इसके परमाणु ईंधन को बदला गया और हथियार प्रणालियों को आधुनिक बनाया गया। इसके बाद यह 2023 में दोबारा सेवा में लौटा।
2024 में फिर जापान पहुंचा, अब मिडिल ईस्ट की ओर रुख
साल 2024 में यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को फिर जापान के योकोसुका बेस पर तैनात किया गया था। वहां इसने यूएसएस रोनाल्ड रीगन की जगह ली थी। अब इसे मिडिल ईस्ट में तैनात यूएसएस अब्राहम लिंकन के स्थान पर भेजा जा रहा है।
अमेरिकी नौसेना के लिए यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय से बना हुआ है। ऐसे में यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन की तैनाती अमेरिकी नौसैनिक शक्ति और लंबी दूरी तक सैन्य अभियान संचालित करने की उसकी क्षमता को दर्शाती है।