नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द ने राजनीतिक बहस को गरमा दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि जहां सुरक्षा बलों ने जंगलों में सक्रिय हथियारबंद माओवादी उग्रवाद को लगभग खत्म कर दिया है, वहीं नक्सली विचारधारा से जुड़े लोग अब ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत दिशा में ले जाने और युवाओं को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के इस बयान पर कांग्रेस, सीपीआई, तृणमूल कांग्रेस और कॉकरोच जनता पार्टी समेत विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
लाल किले से PM मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में कहा कि सुरक्षा बलों ने जंगलों में चल रहे बंदूकधारी माओवादी उग्रवाद को लगभग ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब नक्सली विचारधारा से जुड़े लोग ‘दिमागी नक्सल’ के रूप में देश को गलत रास्ते पर ले जाने और युवाओं को गुमराह करने के अवसर तलाश रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि माओवादी विचारधारा ने दशकों तक सत्ता के गलियारों और सलाहकार समितियों में अपनी जगह बनाकर सरकारी नीतियों को प्रभावित किया। उन्होंने ऐसे लोगों को अलग-थलग करने की जरूरत बताई।
कांग्रेस ने कहा- पहले ‘अर्बन नक्सल’, अब ‘दिमागी नक्सल’
प्रधानमंत्री के बयान के बाद विपक्षी दलों ने उन पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर कहा कि पहले प्रधानमंत्री अपने विरोधियों को ‘अर्बन नक्सल’ कहते थे और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की हताशा का संकेत बताया।
जयराम रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री अक्सर उन्हीं नीतियों को अपनाते हैं, जिनकी सलाह उनकी ओर से निशाना बनाए गए लोग देते हैं।
CJP ने पूछा- सवाल करने वाले युवाओं को नक्सली कैसे कह सकते हैं?
कॉकरोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और स्वतंत्र पत्रकार सौरभ दास ने प्रधानमंत्री की शब्दावली पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि ‘दिमागी नक्सल’ जैसा कोई ठप्पा काम नहीं आएगा। उनका सवाल था कि सरकार से सवाल करने वाले शिक्षित युवाओं को सिर्फ इसी आधार पर नक्सली कैसे कहा जा सकता है।
सौरभ दास ने प्रधानमंत्री के बयान को युवाओं की समस्याओं का समाधान करने में नाकामी और अहंकार से जोड़ा।
CPI ने भी PM के बयान पर साधा निशाना
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव डी. राजा ने प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दक्षिणपंथी राजनीतिक शब्दावली में ‘एंटी-नेशनल’ और ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ जैसे शब्दों के बाद अब ‘दिमागी नक्सल’ का नया लेबल जोड़ा गया है।
डी. राजा ने आरोप लगाया कि इस तरह की शब्दावली असहमति की आवाजों को दबाने और रोजगार तथा शिक्षा की मांग कर रहे युवाओं के मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश है।
महुआ मोइत्रा ने तंज कसते हुए क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी प्रधानमंत्री के बयान पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि वह ‘दिमागी नक्सल’ हैं और परिभाषा के मुताबिक सभी ‘कॉकरोच’ होते हैं।
प्रधानमंत्री के बयान और विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाओं के बीच ‘दिमागी नक्सल’ शब्द अब राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है। 2027 और 2028 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों से पहले लाल किले से दिए गए इस बयान के राष्ट्रीय राजनीति और सुरक्षा से जुड़ी बहस में आगे भी चर्चा का विषय बनने की संभावना है।