कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की मौत हो गई है। उनका शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट में उनके कमरे के बगल में स्थित पार्टी दफ्तर में मिला। पुलिस के मुताबिक, शव फंदे से लटका हुआ मिला। घटना की जानकारी मिलते ही पार्टी दफ्तर के बाहर लोगों की भारी भीड़ जुट गई।
आशीष बनर्जी रामपुरहाट के हट्टालापारा मोहल्ले में रहते थे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है। जब ममता बनर्जी मुख्यमंत्री थीं, उस दौरान आशीष बनर्जी विधानसभा के डिप्टी स्पीकर रहे थे। वह रामपुरहाट सीट से पांच बार विधायक भी रह चुके थे।
पुलिस को मिला सुसाइड नोट, लिखा- मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं
बीरभूम के एसपी विदित राज भुंदेश के मुताबिक, शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें आशीष बनर्जी ने लिखा है कि उनकी मौत के लिए कोई जिम्मेदार नहीं है। पुलिस मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।
ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में होती थी गिनती
आशीष बनर्जी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। वह तृणमूल कांग्रेस के पुराने और अनुभवी नेताओं में शामिल थे। विधानसभा में डिप्टी स्पीकर की जिम्मेदारी संभालने के अलावा वह पश्चिम बंगाल सरकार में शिक्षा और कृषि मंत्री भी रह चुके थे। करीब दो दशक तक वह राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे और टीएमसी के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती थी।
2026 के विधानसभा चुनाव में मिली थी हार
आशीष बनर्जी को 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में रामपुरहाट सीट पर भाजपा उम्मीदवार ध्रुब साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। वह रामपुरहाट और बीरभूम के साथ-साथ राज्य की राजनीति में भी टीएमसी के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे थे।
कुछ महीने पहले उन्होंने टीएमसी की बीरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, उस समय उन्होंने कहा था कि वह पार्टी में एक सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे।
चुनाव के बाद टीएमसी में जारी है बदलाव
2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ी कामयाबी मिली थी और करीब 15 साल तक राज्य की सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस सरकार से बाहर हो गई थी। चुनाव नतीजों के बाद बड़ी संख्या में टीएमसी के विधायक और सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच आशीष बनर्जी की मौत ने पार्टी के भीतर भी हलचल बढ़ा दी है।