मुंबई: महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने अभिनेता अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। मामला विमल इलायची के विज्ञापन से जुड़ा है। FDA को आशंका है कि विज्ञापन के जरिए महाराष्ट्र में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का अप्रत्यक्ष या सरोगेट प्रचार किया जा रहा है। तीनों अभिनेता इस विज्ञापन में ब्रांड के प्रचारक के तौर पर शामिल हैं।
महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला के खिलाफ FDA ने कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग ऐसे मामलों में पुलिस के साथ मिलकर संगठित नेटवर्क के खिलाफ महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत कार्रवाई की तैयारी भी कर रहा है।
FDA ने तीनों अभिनेताओं से मांगा जवाब
इस सप्ताह जारी नोटिस में FDA ने तीनों कलाकारों से विज्ञापन में उनकी भूमिका को लेकर जवाब मांगा है। विभाग का कहना है कि विज्ञापन में विमल ब्रांड की प्रस्तुति ऐसी है, जिससे उसका संबंध पान मसाला उत्पाद से जुड़ता दिखाई देता है। ऐसे में यह प्रतिबंधित उत्पाद के अप्रत्यक्ष प्रचार के दायरे में आ सकता है।
अजय देवगन को नोटिस उनके जुहू स्थित आवास पर, शाहरुख खान को बांद्रा स्थित मन्नत और टाइगर श्रॉफ को उनकी प्रोडक्शन कंपनी टाइगर श्रॉफ प्रोडक्शंस एलएलपी के जरिए भेजा गया है।
FDA के मुताबिक विज्ञापन को पहली नजर में देखने पर ऐसा प्रतीत होता है कि यह विमल ब्रांड का प्रचार है, जिसकी पहचान मुख्य रूप से पान मसाला से जुड़ी हुई है। महाराष्ट्र में पान मसाला के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक साल की रोक लागू है। यह प्रतिबंध 13 जुलाई 2026 को जारी आदेश के तहत प्रभावी हुआ है।
विज्ञापन में क्या देखकर FDA ने उठाए सवाल?
FDA ने विज्ञापन की प्रस्तुति, संवाद, उत्पाद के नाम और बाजार में विमल ब्रांड की पहचान को आधार बनाकर सवाल उठाया है। विभाग यह जांच कर रहा है कि कहीं यह तंबाकू से जुड़े प्रतिबंधित उत्पाद का अप्रत्यक्ष या सरोगेट विज्ञापन तो नहीं है।
नोटिस में फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 की धारा 24 का हवाला दिया गया है। यह प्रावधान भ्रामक और गलत खाद्य विज्ञापनों पर रोक से संबंधित है। वहीं धारा 53 के तहत भ्रामक खाद्य विज्ञापन के प्रकाशन में शामिल व्यक्ति पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। FDA ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशन, 2018 का भी उल्लेख किया है।
महाराष्ट्र में गुटखा-पान मसाला पर पहले से प्रतिबंध
महाराष्ट्र में तंबाकू या निकोटीन वाले गुटखा और पान मसाला पर 2012 से फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धारा 30(2)(a) के तहत रोक है। इस प्रतिबंध को हर साल आगे बढ़ाया जाता है। मौजूदा रोक 13 जुलाई 2026 से लागू है।
FDA के मुताबिक 25 मई से 31 जुलाई के बीच प्रतिबंधित उत्पादों को लेकर 658 जगहों पर छापेमारी की गई। इस दौरान 15.11 करोड़ रुपये का सामान जब्त किया गया, 519 प्राथमिकी दर्ज हुईं और 701 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा प्रतिबंधित सामान ले जाने वाले 78 वाहन भी जब्त किए गए, जिनमें करीब 6.6 करोड़ रुपये का माल था।
गुटखा नेटवर्क पर MCOCA लगाने की तैयारी
12 जून को FDA कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि गुटखा, तंबाकू या निकोटीन वाले पान मसाला और इसी तरह के प्रतिबंधित उत्पादों के कारोबार में यदि संगठित नेटवर्क की भूमिका सामने आती है, तो पुलिस के साथ मिलकर महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट, 1999 के तहत कार्रवाई की जाए।
इससे साफ है कि महाराष्ट्र में प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों के निर्माण और कारोबार के खिलाफ विभाग ने कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है।
विमल इलायची के विज्ञापन पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर पहले भी नियामकीय कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि, उस समय अलग कानून के तहत कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
2018 में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ हेल्थ सर्विसेज ने विष्णु पाउच पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। कंपनी विमल इलायची का प्रचार करती है। DGHS ने सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 के तहत आरोप लगाया था कि विज्ञापन में बॉलीवुड कलाकार को शामिल करके तंबाकू उत्पाद का अप्रत्यक्ष प्रचार किया जा रहा है।
कंपनी ने इन नोटिसों को चुनौती देते हुए कहा था कि वह घरेलू बाजार में विमल ब्रांड के नाम से कोई तंबाकू उत्पाद नहीं बनाती। जनवरी 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उन आदेशों के खिलाफ DGHS की अपील खारिज कर दी थी, जिनमें नोटिस पर रोक लगाई गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने कंपनी को बिना तंबाकू वाले उत्पादों का विज्ञापन जारी रखने की अनुमति दी थी। हालांकि, यह सवाल बना रहा कि इस तरह के अभियान को सरोगेट विज्ञापन माना जा सकता है या नहीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि कंपनी को बिना तंबाकू वाले पान मसाला का कारोबार करने का मौलिक अधिकार है, जब तक संविधान के तहत इसकी अनुमति है।