नई दिल्ली: आज 12 अगस्त 2026, बुधवार को हरियाली अमावस्या मनाई जा रही है। इस दिन साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा। हरियाली अमावस्या पर व्यतीपात योग का संयोग भी बन रहा है, जो दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। सूर्य और चंद्रमा दोनों कर्क राशि में स्थित हैं, जबकि चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहेंगे। आइए जानते हैं आज की तिथि, योग, नक्षत्र, ग्रहण का समय, शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल समेत पूरा पंचांग।
आज की तिथि और योग
तिथि: कृष्ण पक्ष की अमावस्या रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू होगी।
मास: श्रावण
वार: बुधवार
संवत्: 2083
योग: व्यतीपात दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक, इसके बाद वरीयान योग रहेगा।
करण: चतुष्पाद दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इसके बाद नागव करण रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगा और फिर किंस्तुघ्न करण शुरू होगा।
हरियाली अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का समय
12 अगस्त को साल का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण लग रहा है। भारतीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण की शुरुआत रात 9 बजकर 04 मिनट पर होगी और इसका समापन 13 अगस्त की रात 1 बजकर 28 मिनट पर होगा। यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए देश में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 48 मिनट
सूर्यास्त: शाम 7 बजकर 03 मिनट
चंद्रोदय: नहीं होगा, क्योंकि आज अमावस्या तिथि है
चंद्रास्त: शाम 6 बजकर 51 मिनट
सूर्य देव कर्क राशि में स्थित हैं। चंद्रमा भी आज कर्क राशि में ही विराजमान रहेंगे।
आज के शुभ मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त: आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है।
अमृत काल: 13 अगस्त को तड़के 4 बजकर 38 मिनट से सुबह 6 बजकर 06 मिनट तक रहेगा।
आज का राहुकाल और अशुभ समय
राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 26 मिनट से 2 बजकर 05 मिनट तक
गुलिकाल: सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक
यमगण्ड: सुबह 7 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 07 मिनट तक
आज पुष्य नक्षत्र में रहेंगे चंद्रमा
आज चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहेंगे। पुष्य नक्षत्र सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, इसके बाद अश्लेषा नक्षत्र शुरू होगा।
पुष्य नक्षत्र का विस्तार 3°20’ कर्क राशि से 16°40’ कर्क राशि तक माना जाता है। इसके स्वामी शनिदेव हैं, जबकि राशि स्वामी चंद्रमा हैं। इस नक्षत्र के देवता बृहस्पति यानी देवगुरु हैं। इसका प्रतीक गाय का थन या कमल माना जाता है।
पुष्य नक्षत्र से जुड़े सामान्य गुणों में परोपकार, देखभाल, पोषण, मेहनत, धैर्य, शांति, न्यायप्रियता और समाज सुधार की भावना को प्रमुख माना जाता है।