गंगटोक: हिमालय की गोद में बसा सिक्किम सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि अपने इतिहास और रणनीतिक महत्व के लिए भी खास है। नेपाल, भूटान और चीन की सीमाओं से सटा यह राज्य कभी नामग्याल वंश के चोग्यालों के शासन में था। करीब 333 साल तक राजशाही के अधीन रहने के बाद 1975 में सिक्किम भारत का 22वां राज्य बना। पूर्वोत्तर के सात राज्यों को जहां ‘सेवन सिस्टर्स’ यानी सात बहनें कहा जाता है, वहीं सिक्किम को इनका ‘भाई’ कहा जाता है। लेकिन सवाल है कि भौगोलिक रूप से अलग होने के बावजूद सिक्किम का यह रिश्ता कैसे बना?
कौन हैं नॉर्थ ईस्ट की ‘सात बहनें’?
अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा को सामूहिक रूप से ‘सेवन सिस्टर्स’ कहा जाता है। यह किसी संवैधानिक व्यवस्था में इस्तेमाल होने वाला आधिकारिक नाम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर के इन राज्यों के लिए लोकप्रिय रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला संबोधन है।
‘सेवन सिस्टर्स’ शब्द का उल्लेख पहली बार जनवरी 1972 में त्रिपुरा के पत्रकार ज्योति प्रसाद सैकिया ने एक रेडियो कार्यक्रम के दौरान किया था। बाद में 1976 में उन्होंने ‘द लैंड ऑफ सेवन सिस्टर्स’ नाम से किताब लिखी, जिसके बाद यह नाम और ज्यादा प्रचलित हो गया।
इन सातों राज्यों का गठन एक ही समय पर नहीं हुआ था। असम 1950 में राज्य बना, जबकि नागालैंड को 1963 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। मेघालय, मणिपुर और त्रिपुरा 1972 में राज्य बने। वहीं मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश को 1987 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिला।
सिक्किम कैसे बना सात बहनों का ‘भाई’?
सिक्किम भौगोलिक रूप से सेवन सिस्टर्स से अलग है। इसके और पूर्वोत्तर के सात राज्यों के बीच पश्चिम बंगाल का क्षेत्र आता है। इसके बावजूद प्रशासनिक और रणनीतिक जुड़ाव ने सिक्किम को पूर्वोत्तर के इस समूह से जोड़ दिया।
सिक्किम नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल यानी एनईसी का हिस्सा है। वर्ष 2002 में कानून में संशोधन के बाद इसे परिषद का औपचारिक सदस्य बनाया गया। इससे पहले परिषद में पूर्वोत्तर के सातों राज्य शामिल थे। सिक्किम के शामिल होने के बाद पूर्वोत्तर के राज्यों का यह समूह आठ राज्यों का हो गया। इसी वजह से सिक्किम को ‘सेवन सिस्टर्स का भाई’ या पूर्वोत्तर का आठवां राज्य कहा जाने लगा।
सिक्किम का रणनीतिक महत्व भी इस जुड़ाव को और खास बनाता है। भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से सटा यह राज्य पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा और संपर्क व्यवस्था में अहम भूमिका रखता है।
सिक्किम पर 333 साल तक चला नामग्याल वंश का शासन
सिक्किम का आधुनिक राजनीतिक इतिहास नामग्याल वंश से गहराई से जुड़ा है। वर्ष 1642 में युक्सोम में तीन तिब्बती लामाओं ने फुंत्सोग नामग्याल को सिक्किम का पहला चोग्याल घोषित किया। इसके साथ ही नामग्याल वंश के शासन की शुरुआत हुई।
इस वंश ने करीब 333 साल तक सिक्किम पर शासन किया। इस दौरान राज्य की राजधानी भी बदलती रही। युक्सोम के बाद रबडेंत्से और फिर तुमलोंग राजधानी बनी। वर्ष 1894 में गंगटोक को सिक्किम की राजधानी बनाया गया।
ब्रिटिश प्रभाव में कैसे आया सिक्किम?
सिक्किम पर ब्रिटिश प्रभाव बढ़ने का सिलसिला 19वीं सदी में तेज हुआ। 1817 की टिटालिया संधि और 1861 की तुमलोंग संधि के बाद सिक्किम पर ब्रिटिश प्रभाव मजबूत हुआ। 1861 के बाद ब्रिटिश साम्राज्य का नियंत्रण बढ़ा, हालांकि चोग्याल का स्थानीय शासन बना रहा।
इसके बाद 1890 के एंग्लो-चाइनीज कन्वेंशन के जरिए सिक्किम की स्थिति को लेकर ब्रिटिश और चीन के बीच समझ बनी। इस दौर में सिक्किम ब्रिटिश प्रभाव में रहा, लेकिन आंतरिक शासन चोग्याल के पास ही रहा।
आजादी के बाद भी सिक्किम रहा अलग राजनीतिक इकाई
भारत की आजादी के बाद भी सिक्किम तत्काल भारत का हिस्सा नहीं बना। 5 दिसंबर 1950 को भारत सरकार और सिक्किम के महाराजा के बीच भारत-सिक्किम संधि हुई। इसके तहत भारत ने सिक्किम की रक्षा, विदेश मामलों और संचार से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं, जबकि आंतरिक शासन की जिम्मेदारी चोग्याल के पास रही।
हालांकि समय के साथ सिक्किम में राजशाही के खिलाफ असंतोष बढ़ता गया। 1973 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। इसके बाद 1974 में सिक्किम को ‘एसोसिएट स्टेट’ का दर्जा दिया गया।
1974 के चुनाव से 1975 के जनमत संग्रह तक बदली तस्वीर
अप्रैल 1974 में सिक्किम में चुनाव हुए। काजी ल्हेंदुप दोरजी के नेतृत्व वाली सिक्किम कांग्रेस ने बड़ी जीत हासिल की। इसी वर्ष भारतीय संसद ने 35वां संविधान संशोधन अधिनियम पारित किया। इसके जरिए संविधान में अनुच्छेद 2ए और दसवीं अनुसूची जोड़ी गई और सिक्किम को भारत का सहयोगी राज्य बनाया गया।
इसके बाद अप्रैल 1975 में जनमत संग्रह हुआ। इसमें राजशाही खत्म करने और भारत के साथ पूर्ण विलय के पक्ष में भारी समर्थन मिला। इसके बाद सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य बन गया और वह देश का 22वां राज्य बना।