वॉशिंगटन। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने मॉस्को पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट ने रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों वाला नया बिल पास कर दिया है, जो अब वैश्विक व्यापार समीकरणों को बदल सकता है। इस बिल के पक्ष में 86 और विरोध में 12 वोट पड़े।
अगर यह विधेयक कानून बन जाता है, तो रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों—जिनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, अजरबैजान और हंगरी शामिल हैं पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन के हाथ में रहेगा।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर निशाना
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का यह बिल उन देशों को टारगेट करता है जो रूस से बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात कर रहे हैं। अमेरिका चाहता है कि वैश्विक स्तर पर रूस की ऊर्जा आय पर रोक लगे, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़े।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता
भारत के लिए यह स्थिति खासतौर पर संवेदनशील है। हाल के महीनों में भारत ने रूस से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया है। जून 2026 में यह आयात 34% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। भारत फिलहाल चीन के बाद रूस से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला दूसरा देश है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अस्थिरता के चलते भारत ने वैकल्पिक स्रोत के रूप में रूस का रुख किया है। ऐसे में अगर अमेरिकी बिल लागू होता है, तो भारत के ऊर्जा और व्यापार दोनों पर असर पड़ सकता है।
राहत की उम्मीद भी बनी हुई
अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने संकेत दिया था कि जिन देशों की रूसी गैस खरीद 15% से कम होगी, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
पहले भी लग चुका है टैरिफ
अमेरिका पहले भी भारत को रूस से तेल खरीदने पर चेतावनी दे चुका है। अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50% तक पहुंच गया था। इससे दोनों देशों के व्यापार पर असर पड़ा था।
अब नए बिल के लागू होने की स्थिति में भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में फिर तनाव बढ़ सकता है।