मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राजधानी भोपाल में कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के साथ किसानों की देर रात चली बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के नेतृत्व में किसान बरकतुल्लाह यूनिवर्सिटी के पास नर्मदापुरम रोड पर धरने पर डटे हुए हैं। आंदोलन के चलते भोपाल के कई स्कूलों में अवकाश घोषित करना पड़ा है।
1. आंदोलन का मुख्य कारण: मूंग की शत-प्रतिशत खरीदी
किसानों का मुख्य विरोध प्रदर्शन ग्रीष्मकालीन मूंग (Summer Moong) की सरकारी खरीदी के सीमित कोटे को लेकर है। किसानों का आरोप है कि राज्य में बंपर पैदावार होने के बावजूद सरकार द्वारा तय किया गया खरीदी लक्ष्य बहुत कम है, जिससे किसानों को औने-पौने दामों पर अपनी उपज खुले बाजार में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
2. सरकार और किसानों की बातचीत बेनतीजा
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और किसान नेताओं के बीच लंबी बातचीत चली, लेकिन एमएसपी (MSP) और शत-प्रतिशत खरीदी के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और साफ कह दिया है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, धरना जारी रहेगा।
3. केंद्र सरकार को भेजा गया था प्रस्ताव
मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी का लक्ष्य बढ़ाने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था।
- प्रस्तावित लक्ष्य: 8.06 लाख मीट्रिक टन
- मंजूर हुआ लक्ष्य: 4.54 लाख मीट्रिक टन
- उत्पादन का अनुमान: राज्य में इस साल कुल उत्पादन करीब 20.16 लाख मीट्रिक टन होने की संभावना है।
- पंजीकरण और खरीदी: अब तक 3.47 लाख किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है, लेकिन इनमें से केवल 82 हजार किसानों की ही मूंग खरीदी जा सकी है।
4. किसानों की प्रमुख मांगें
- मूंग की 100% सरकारी खरीदी सुनिश्चित की जाए।
- खरीद का कोटा बढ़ाया जाए और भुगतान में हो रही देरी को खत्म किया जाए।
- खाद वितरण के लिए लागू ई-टोकन व्यवस्था में सुधार किया जाए।
- प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित फसलों का उचित मुआवजा दिया जाए।
5. शांतिपूर्ण प्रदर्शन और पुलिस प्रशासन की तैयारी
नर्मदापुरम और अन्य जिलों से पैदल मार्च करते हुए भोपाल पहुंचे किसानों ने रास्ते में तीन बैरिकेड्स पार किए, लेकिन पूरा प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है। धरनास्थल पर खुद किसान दाल-बाटी बनाते हुए नजर आए। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भोपाल में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के वास्ते रूट डायवर्ट किए गए हैं।