नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की वैश्विक दौड़ में पिछले कुछ महीनों के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिस क्षेत्र में अब तक अमेरिकी टेक कंपनियों का दबदबा माना जाता था, वहां अब चीनी एआई मॉडल तेजी से अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले शीर्ष 50 एआई मॉडल्स में चीन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है, जबकि अमेरिकी मॉडल्स की संख्या में गिरावट दर्ज की गई है।
टॉप-50 एआई मॉडल्स में चीन की मजबूत एंट्री
रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा उपयोग किए जाने वाले 50 एआई मॉडल्स में अब 20 मॉडल चीन के हैं। यानी कुल हिस्सेदारी 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। वहीं अमेरिकी मॉडल्स की संख्या घटकर 28 रह गई है, जो पहले 33 थी।
बताया गया है कि वर्ष 2025 की शुरुआत में शीर्ष 50 एआई मॉडल्स में चीन के केवल पांच मॉडल शामिल थे। लगभग 14 महीनों के भीतर यह संख्या बढ़कर 20 तक पहुंच गई, जिससे वैश्विक एआई बाजार में चीन की स्थिति काफी मजबूत हुई है।
कैसे बदला पूरा समीकरण?
पिछले डेढ़ साल के दौरान चीनी एआई कंपनियों ने तेजी से नए मॉडल विकसित किए हैं। खासतौर पर DeepSeek जैसे मॉडल्स के आने के बाद वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में बड़ा बदलाव देखने को मिला।
जहां पहले चीन की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत थी, वहीं अब यह बढ़कर 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके विपरीत अमेरिकी मॉडल्स की संख्या लगातार कम हुई है।
टोकन प्रोसेसिंग में भी चीन आगे निकला
एआई मॉडल्स के प्रदर्शन का एक बड़ा पैमाना टोकन प्रोसेसिंग भी माना जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, जून महीने में चीन के शीर्ष 20 एआई मॉडल्स ने करीब 98 ट्रिलियन टोकन प्रोसेस किए, जबकि अमेरिकी मॉडल्स ने 53 ट्रिलियन टोकन ही प्रोसेस किए।
मई से जून के बीच चीनी मॉडल्स की टोकन प्रोसेसिंग में 113 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी मॉडल्स में यह वृद्धि 43 प्रतिशत रही।
क्यों बढ़ रही है चीनी एआई मॉडल्स की लोकप्रियता?
विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी एआई मॉडल्स अपेक्षाकृत कम लागत में विकसित किए जा रहे हैं। DeepSeek इसका प्रमुख उदाहरण माना जा रहा है, जिसे अमेरिकी लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स की तुलना में काफी कम लागत में तैयार किया गया।
कम खर्च, बेहतर उपलब्धता और तेज विकास की वजह से दुनियाभर में इन मॉडल्स की मांग लगातार बढ़ रही है।
तकनीकी प्रतिस्पर्धा ने बढ़ाई दूरी
अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है। दोनों देशों के बीच तकनीक साझा करने को लेकर भी प्रतिबंध बढ़े हैं।
हाल ही में अमेरिकी कंपनी Anthropic ने अपने नए एआई मॉडल्स को चीनी कंपनियों से दूर रखा। वहीं चीन की कंपनी अलीबाबा ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए Anthropic के एजेंटिक एआई Claude के उपयोग पर रोक लगाने की घोषणा की और वैकल्पिक टूल अपनाने की सलाह दी।
इसके अलावा अमेरिकी कंपनियां लगातार चीनी कंपनियों पर एआई मॉडल्स की नकल और तकनीक चोरी के आरोप भी लगाती रही हैं।