नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद करने के ऐलान के बाद अमेरिका ने कई सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। लगातार बढ़ते हमलों के बीच पूरे मध्य-पूर्व में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और बड़े युद्ध की आशंका गहरा गई है।
होर्मुज बंद करने के ऐलान के बाद भड़का विवाद
तनाव की शुरुआत तब हुई जब ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को अगले नोटिस तक बंद करने का फैसला किया। इसके कुछ ही घंटों बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में बुशहर समेत कई अहम इलाकों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया।
फिर बना सबसे बड़ा टकराव का केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे अहम मोर्चे के रूप में उभरकर सामने आया है। यही कारण रहा कि दोनों देशों के बीच पहले हुई बातचीत में भी इस समुद्री मार्ग को लेकर लंबी चर्चा हुई थी। सीजफायर के दौरान ईरान ने इसे खोलने का फैसला किया था, लेकिन अब एक बार फिर यही इलाका दोनों देशों के टकराव का केंद्र बन गया है।
कमर्शियल जहाज पर हमले से बढ़ा तनाव
ताजा विवाद की वजह एक व्यावसायिक जहाज पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की कार्रवाई को बताया जा रहा है। ईरान का दावा है कि जहाज ने तय समुद्री मार्ग का पालन नहीं किया, अपना नेविगेशन सिस्टम बंद रखा और चेतावनी के बावजूद रास्ता नहीं बदला। इसी वजह से उस पर कार्रवाई की गई।
इसके बाद ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि जब तक क्षेत्र में अमेरिका का दखल खत्म नहीं होगा, तब तक होर्मुज को नहीं खोला जाएगा। साथ ही किसी भी सैन्य कार्रवाई का कड़ा जवाब देने की चेतावनी भी दोहराई गई।
अमेरिका का दावा- 300 से ज्यादा ठिकानों पर कार्रवाई
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, पिछले तीन दिनों में ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज में व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना था।
अमेरिकी सेना ने यह भी कहा कि उसने अब तक 800 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित तरीके से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कराने में मदद की है, जिनमें लगभग 40 करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज शामिल थे।
ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने कतर स्थित अल उदीद एयरबेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। ईरान के अनुसार, इस कार्रवाई में लड़ाकू विमानों के रखरखाव केंद्र और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर को निशाना बनाया गया।
इसके अलावा ओमान के दुक्म पोर्ट पर अमेरिकी लॉजिस्टिक सपोर्ट सेंटर और ईंधन आपूर्ति प्लेटफॉर्म पर भी हमले का दावा किया गया है। ईरान का कहना है कि इन हमलों में अमेरिकी सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
क्या दुनिया पर फिर मंडरा रहा ऊर्जा संकट?
लगातार बढ़ते सैन्य तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद होता है तो वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर इसका कितना बड़ा असर पड़ेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी कीमत पर होर्मुज पर अपने नियंत्रण से पीछे नहीं हटेगा।
अमेरिका की सैन्य कार्रवाई और ईरान के जवाबी हमलों के बाद मध्य-पूर्व में हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या यह टकराव व्यापक युद्ध का रूप लेगा या कूटनीतिक प्रयास तनाव को कम करने में सफल होंगे।