भारत के इलेक्ट्रिक व्हीकल रिवॉल्यूशन में उत्तर प्रदेश एक बड़े पावर सेंटर के रूप में उभरा है। नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश के कुल ईवी मार्केट में अकेले यूपी की हिस्सेदारी बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। इस शानदार ग्रोथ को देखते हुए राज्य सरकार ने अब अगले दो सालों में इस मार्केट शेयर को 30 प्रतिशत तक ले जाने का एक बड़ा टारगेट सेट किया है।
सब्सिडी की ‘सुनामी’ और मेगा डिमांड
यूपी में ईवी की डिमांड तेजी से बढ़ने की सबसे बड़ी वजह राज्य सरकार की आक्रामक सब्सिडी पॉलिसी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में सब्सिडी के लिए आने वाले एप्लीकेशन्स में पिछले साल के मुकाबले 241% का भारी उछाल देखा गया है। सरकार ने अब तक लगभग 86,489 से ज्यादा सब्सिडी आवेदनों को ग्रीन सिग्नल दे दिया है, जिसका पैसा सीधे लोगों के बैंक खातों में पहुंच रहा है।
टू-व्हीलर्स और फोर-व्हीलर्स का दबदबा
राज्य में सबसे ज्यादा क्रेज इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स “स्कूटर/बाइक” और फोर-व्हीलर्स का है। अप्रूव्ड की गई सब्सिडी के आंकड़ों पर नजर डालें तो –
- टू-व्हीलर्स: 61,417 गाड़ियों को अब तक सब्सिडी मिल चुकी है।
- फोर-व्हीलर्स: 24,959 कारों और SUVs ने सड़कों पर धाक जमाई है।
- ई-गुड्स कैरियर: कमर्शियल सेक्टर में भी बदलाव शुरू हो चुका है, जहां 104 मालवाहक वाहनों को मंजूरी मिली है।
38,000 स्टेशंस का मास्टर प्लान
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती संख्या को सपोर्ट करने के लिए राज्य में चार्जिंग नेटवर्क को तेजी से अपग्रेड किया जा रहा है। पिछले 5 सालों में यूपी में 2,316 चार्जिंग स्टेशंस (540 फास्ट और 1,776 स्लो चार्जर्स) लगाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य आने वाले समय में पूरे राज्य में PPP (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर 38,000 चार्जिंग स्टेशंस खड़े करने का है, ताकि हाईवे हो या शहर, लोगों को रेंज की टेंशन न रहे।
डिजिटल प्रोसेस से काम हुआ आसान
सरकार ने लेटलतीफी को खत्म करने के लिए पूरे सब्सिडी प्रोसेस को 100% ऑनलाइन कर दिया है। एक डेडिकेटेड पोर्टल upevsubsidy.in के जरिए लोग बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे अप्लाई कर रहे हैं।
ई-बसों को छोड़कर बाकी सभी कैटेगरीज की सब्सिडी का क्लियरेंस RTO ऑफिस के माध्यम से डायरेक्ट-बेनिफिट-ट्रांसफर के जरिए सीधे लाभार्थी के बैंक अकाउंट में भेजा जा रहा है।