अंकारा। आमतौर पर जब दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष या अंतरराष्ट्रीय नेता आपस में मिलते हैं, तो उपहार के तौर पर वहां की प्रसिद्ध मिठाईयां, पारंपरिक कपड़े, कीमती धातुएं या ऐतिहासिक पुस्तकें (जैसे पीएम मोदी अक्सर भगवद्गीता भेंट करते हैं) दी जाती हैं। लेकिन तुर्किए (तुर्की) की राजधानी अंकारा में आयोजित 36वें नाटो समिट (36th NATO Summit) में कुछ ऐसा हुआ, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिज्ञों को हैरान कर दिया है।
तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने समिट में आए मेहमान देशों के राष्ट्राध्यक्षों को रिटर्न गिफ्ट में पिस्टल (पिस्तौल) और गोलियों का डिब्बा भेंट किया है।
खास तौर पर तैयार की गई थी ‘नेम-प्लेट’ वाली पिस्टल
अंकारा पहुंचे दुनिया के शक्तिशाली नेताओं को जब यह तोहफा मिला, तो हर कोई दंग रह गया। इस गिफ्ट की सबसे खास बात यह थी कि हर पिस्टल पर उसे पाने वाले नेता का नाम विशेष रूप से खुदा (Engraved) हुआ था।
गिफ्ट पाने वाले दिग्गजों में शामिल हैं:
- डोनाल्ड ट्रंप (राष्ट्रपति, अमेरिका)
- इमैनुएल मैक्रों (राष्ट्रपति, फ्रांस)
- कीर स्टॉर्मर (प्रधानमंत्री, ब्रिटेन)
- मार्क कार्नी (प्रधानमंत्री, कनाडा)
नोट: हालांकि सुरक्षा कारणों से यह जानकारी अभी सामने नहीं आई है कि ये पिस्टल किस ब्रांड या बोर की थीं।
सख्त कानून बने विलेन: ब्रिटिश और कनाडाई पीएम क्यों नहीं ले जा सके अपना गिफ्ट?
इस अनोखे गिफ्ट की चर्चा तब शुरू हुई जब ब्रिटिश पीएम कीर स्टॉर्मर ने खुद पत्रकारों को इस बारे में बताया। दिलचस्प बात यह है कि ब्रिटेन और कनाडा के राष्ट्राध्यक्ष इस कीमती तोहफे को अपने वतन नहीं ले जा सके:
- ब्रिटेन के सख्त हथियार कानून: ब्रिटेन में गन लॉ बेहद कड़े हैं। वहां आम नागरिक तो दूर, प्रधानमंत्री भी किसी पिस्तौल को अपने निजी सामान (Personal Baggage) की तरह देश में नहीं ला सकते। इसलिए स्टॉर्मर को अपनी पिस्टल तुर्किए में ही छोड़नी पड़ी।
- कनाडा की आरसीएमपी (RCMP) को सौंपी गन: कनाडा के पीएम मार्क कार्नी भी इसे अपने साथ सीधे घर नहीं ले जा सके। उन्होंने पिस्टल को ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस’ को सौंप दिया, जबकि गोलियां तुर्किए में ही छोड़ दी गईं। अब कनाडाई नियमों के तहत इस सरकारी गिफ्ट को रखने के लिए सही जगह तलाशी जा रही है।
कूटनीति या बिजनेस? राष्ट्रपति एर्दोगन ने क्यों दिया ‘हथियार’ का तोहफा?
राष्ट्रपति एर्दोगन के इस कदम के पीछे गहरे ऐतिहासिक और आर्थिक मायने छिपाए जा रहे हैं:
1. ऑटोमन साम्राज्य की ऐतिहासिक परंपरा
तुर्किए में सदियों पुराने ऑटोमन साम्राज्य (Ottoman Empire) के समय से ही विदेशी शासकों और सैन्य मेहमानों को सजावटी तलवारें, खंजर या बंदूकें भेंट करने का रिवाज रहा है। यह मेहमान के प्रति सम्मान और अपनी सैन्य विरासत दिखाने का एक तरीका है।
2. तुर्किए के डिफेंस मार्केट के लिए ‘ग्लोबल मार्केटिंग’
तुर्किए आज के समय में डिफेंस सेक्टर का उभरता हुआ खिलाड़ी है। वह बाइरकटार (Bayraktar) ड्रोन, टीएफ कान (TF Kaan) लड़ाकू विमान, तैफून मिसाइल और अल्ताय टैंक जैसे अत्याधुनिक हथियार बनाता है। इसके अलावा स्मॉल आर्म्स (पिस्टल और रिवॉल्वर) बनाने में भी तुर्किए अव्वल है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि एर्दोगन नाटो देशों के सामने अपने हथियारों की ब्रांडिंग कर रहे हैं। पिस्टल साइज में छोटी और ले जाने में आसान थी, इसलिए इसे ‘सैंपल’ के तौर पर चुना गया ताकि भविष्य में अरबों डॉलर के हथियारों के व्यापार की राह खुल सके।
3. ब्रिटेन से बैन हटवाने की रणनीति
हाल ही में एर्दोगन ने ब्रिटिश पीएम कीर स्टॉर्मर को पत्र लिखकर तुर्किए के वेपन एक्सपोर्ट (हथियार निर्यात) पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की मांग की थी। ऐसे में नाटो सहयोगियों को पिस्टल गिफ्ट करना इस बात का साफ संकेत है कि तुर्किए मंदी और वैश्विक तनाव के इस दौर में नए रक्षा बाजार की तलाश में है।