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क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

vineet verma
Last updated: July 9, 2026 6:00 am
vineet verma
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नई दिल्ली: देश में मानसून की दस्तक हो चुकी है। दक्षिण भारत से शुरुआत करने के बाद अब मानसूनी बारिश धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ रही है। इस बार मानसून सामान्य से कुछ पहले पहुंचा है। हर साल जून से सितंबर तक सक्रिय रहने वाला मानसून करोड़ों लोगों के जीवन, खेती और जल संसाधनों के लिए बेहद अहम माना जाता है। लेकिन आखिर यह बनता कैसे है और पूरे देश में चार महीने तक बारिश कैसे कराता है, इसकी पूरी प्रक्रिया बेहद दिलचस्प है।

Contents
कैसे बनता है मानसून और कैसे शुरू होती है बारिश?सबसे पहले कहां पहुंचता है मानसून?दो हिस्सों में बंट जाती हैं मानसूनी हवाएंहिमालय नहीं होता तो उत्तर भारत सूखा रह जातादेश में कहां कितनी होती है बारिश?किन राज्यों तक कब पहुंचता है मानसून?तमिलनाडु में अलग तरह से होती है मानसूनी बारिश

मानसून शब्द की जड़ें भी काफी रोचक हैं। अंग्रेजी का “मानसून” शब्द पुर्तगाली शब्द “मान्सैओ” (Moncao) से निकला माना जाता है, जिसकी उत्पत्ति अरबी शब्द “मावसिम” यानी मौसम से हुई है। यही शब्द आगे चलकर हिंदी, उर्दू और उत्तर भारतीय भाषाओं में भी प्रचलित हो गया। भारत में मानसून का मौसम सामान्य तौर पर जून से शुरू होकर सितंबर तक चलता है।

मौसम विभाग इन चार महीनों के दौरान होने वाली बारिश का अनुमान कई वैज्ञानिक मानकों के आधार पर लगाता है। देश में 127 कृषि जलवायु उप-क्षेत्र और कुल 36 जलवायु क्षेत्र हैं। समुद्र, हिमालय और रेगिस्तान जैसे भौगोलिक कारक मानसून को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि बारिश का सटीक अनुमान लगाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहता है।

कैसे बनता है मानसून और कैसे शुरू होती है बारिश?

गर्मी के मौसम में जब सूर्य विषुवत रेखा के ऊपर होता है, तब हिंद महासागर का पानी तेजी से गर्म होकर करीब 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। दूसरी ओर, भारतीय भूभाग का तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। तापमान के इस बड़े अंतर के कारण हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में मानसूनी हवाएं सक्रिय होती हैं।

ये हवाएं विषुवत रेखा को पार करते हुए एशिया की ओर बढ़ती हैं। इसी दौरान समुद्र के ऊपर बड़े पैमाने पर बादल बनने लगते हैं। आगे बढ़ते हुए ये बादल और हवाएं बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर तक पहुंचते हैं। चूंकि उस समय जमीन का तापमान समुद्र से अधिक होता है, इसलिए हवाएं समुद्र से नमी लेकर भारतीय भूभाग की ओर बहती हैं। जमीन पर पहुंचने के बाद ये ऊपर उठती हैं और वर्षा का कारण बनती हैं।

सबसे पहले कहां पहुंचता है मानसून?

भारत में मानसून सबसे पहले अंडमान-निकोबार द्वीप समूह पहुंचता है। इसके बाद यह केरल में प्रवेश करता है और फिर धीरे-धीरे पूरे देश में फैलता जाता है। सामान्य तौर पर 1 जून के आसपास केरल में मानसून की दस्तक मानी जाती है।

दो हिस्सों में बंट जाती हैं मानसूनी हवाएं

बंगाल की खाड़ी और अरब सागर तक पहुंचने के बाद मानसूनी हवाएं दो शाखाओं में विभाजित हो जाती हैं। एक शाखा अरब सागर से होकर मुंबई, गुजरात और राजस्थान की ओर बढ़ती है। दूसरी शाखा बंगाल की खाड़ी से पश्चिम बंगाल, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों तक पहुंचती है। इसके बाद हिमालय से टकराकर यह गंगा के मैदानी इलाकों की ओर मुड़ जाती है।

इसी प्रक्रिया के चलते जुलाई के पहले सप्ताह तक देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश शुरू हो जाती है।

हिमालय नहीं होता तो उत्तर भारत सूखा रह जाता

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में मानसूनी बारिश के पीछे हिमालय की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है। बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाएं हिमालय से टकराकर वापस मुड़ती हैं और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बारिश कराती हैं। यदि हिमालय पर्वत श्रृंखला नहीं होती तो उत्तर भारत में मानसून की बारिश लगभग संभव नहीं होती। राजस्थान में मामूली बारिश के साथ मानसून का प्रभाव धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है।

देश में कहां कितनी होती है बारिश?

मानसून के चार महीनों के दौरान भारत में औसतन 89 सेंटीमीटर वर्षा होती है। देश की करीब 65 प्रतिशत कृषि मानसूनी बारिश पर निर्भर रहती है। इसके अलावा बिजली उत्पादन और नदियों में जल प्रवाह भी काफी हद तक मानसून पर आधारित है।

पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर राज्यों में 200 से लेकर 1000 सेंटीमीटर तक बारिश दर्ज होती है। वहीं राजस्थान और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में मानसून के दौरान केवल 10 से 15 सेंटीमीटर तक वर्षा होती है।

चेरापूंजी में सालभर में करीब 1100 सेंटीमीटर तक बारिश होती है। केरल में मानसून जून की शुरुआत से अक्टूबर तक लगभग पांच महीने सक्रिय रहता है, जबकि राजस्थान में मानसूनी बारिश का दौर करीब डेढ़ महीने तक ही सीमित रहता है। यहीं से मानसून की विदाई भी शुरू होती है।

किन राज्यों तक कब पहुंचता है मानसून?

अरब सागर से आने वाली मानसूनी हवाएं सामान्य तौर पर 10 जून तक मुंबई पहुंच जाती हैं। जून के पहले सप्ताह तक मानसून असम भी पहुंच जाता है। इसके बाद हिमालय से टकराकर हवाएं पश्चिम की ओर मुड़ती हैं। कोलकाता में मानसून सामान्य रूप से मुंबई से कुछ दिन पहले, करीब 7 जून के आसपास पहुंचता है।

मध्य जून तक अरब सागर की शाखा सौराष्ट्र, कच्छ और मध्य भारत तक फैल जाती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों की हवाएं मिलकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पूर्वी राजस्थान में लगभग 1 जुलाई से बारिश शुरू कराती हैं।

दिल्ली में मानसून की पहली बारिश कभी बंगाल की खाड़ी से आने वाली हवाओं के प्रभाव से होती है तो कई बार अरब सागर की शाखा के कारण दक्षिण दिशा से आने वाली हवाएं पहली बौछार लेकर पहुंचती हैं। जुलाई के मध्य तक मानसून कश्मीर सहित देश के लगभग सभी हिस्सों में फैल जाता है, हालांकि तब तक इसकी नमी काफी कम हो चुकी होती है।

तमिलनाडु में अलग तरह से होती है मानसूनी बारिश

सर्दियों के दौरान स्थल भाग तेजी से ठंडे हो जाते हैं, जिससे उत्तर-पूर्वी मानसून सक्रिय होता है। इसकी दिशा दक्षिण-पश्चिम मानसून से बिल्कुल विपरीत होती है। जनवरी की शुरुआत तक उत्तर-पूर्वी मानसून भारत के कई हिस्सों में प्रभावी रहता है।

इस दौरान एशियाई भूभाग का तापमान सबसे कम होता है और उच्च दाब का क्षेत्र पश्चिम में भूमध्यसागर से लेकर उत्तर-पूर्वी चीन तक फैला रहता है। इस वजह से भारत में साफ आसमान, कम नमी और हल्की उत्तरी हवाएं चलती हैं।

उत्तर-पूर्वी मानसून से होने वाली बारिश भले ही कम होती है, लेकिन यह रबी फसलों के लिए बेहद लाभदायक मानी जाती है। तमिलनाडु में सबसे अधिक वर्षा इसी उत्तर-पूर्वी मानसून के दौरान होती है। पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाओं के कारण दक्षिण-पश्चिम मानसून से यहां अपेक्षाकृत कम बारिश होती है, इसलिए नवंबर और दिसंबर में उत्तर-पूर्वी मानसून तमिलनाडु का प्रमुख वर्षाकाल बन जाता है।

 

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