नई दिल्ली: बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करने की आदत और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण कम उम्र में भी डायबिटीज और हाई ब्लड शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। आमतौर पर ब्लड शुगर नियंत्रित रखने के लिए लंबी वॉक या नियमित व्यायाम की सलाह दी जाती है, लेकिन अब एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि हर 45 मिनट बाद सिर्फ 3 मिनट की हल्की एक्सरसाइज भी ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है।
बोर्ड-प्रमाणित इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. ऑस्टिन पर्ल मटर ने एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि दिनभर लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय हर 45 मिनट में कुछ मिनट की हल्की शारीरिक गतिविधि करना मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
रिसर्च में क्या सामने आया?
अध्ययन में अधिक वजन वाले पुरुषों को करीब साढ़े आठ घंटे तक अलग-अलग गतिविधियों के आधार पर चार समूहों में बांटा गया। एक समूह लगातार बैठा रहा, दूसरे ने केवल 30 मिनट की वॉक की, तीसरे ने हर 45 मिनट में 3 मिनट तक पैदल चला और चौथे समूह ने हर 45 मिनट में लगभग 10 बॉडी-वेट स्क्वाट्स किए।
रिसर्च के अनुसार, जिन लोगों ने हर 45 मिनट में थोड़ी-थोड़ी देर चलना या स्क्वाट्स किए, उनका ब्लड शुगर स्तर उन लोगों की तुलना में बेहतर पाया गया, जिन्होंने पूरे दिन बैठने के बाद केवल एक बार 30 मिनट की वॉक की।
स्क्वाट्स क्यों हो सकते हैं ज्यादा असरदार?
विशेषज्ञों के मुताबिक स्क्वाट्स करने से जांघ और कूल्हों की बड़ी मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। ये मांसपेशियां खून में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करने लगती हैं, जिससे ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। अध्ययन में ग्लूटियस मैक्सिमस और क्वाड्रिसेप्स मांसपेशियों की सक्रियता को बेहतर मेटाबॉलिज्म से भी जोड़ा गया।
बार-बार थोड़ा चलना क्यों जरूरी है?
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कई घंटे बैठे रहने से शरीर की मांसपेशियां ग्लूकोज का उपयोग कम करने लगती हैं। इसके विपरीत, हर आधे से एक घंटे में कुछ मिनट टहलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्की एक्सरसाइज करने से शरीर बार-बार सक्रिय होता है, जिससे ब्लड शुगर और इंसुलिन संवेदनशीलता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
सिर्फ एक बार वॉक करना काफी नहीं?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति 10–12 घंटे लगातार बैठकर काम करता है और दिन में केवल एक बार आधा घंटा टहलता है, तो भी लंबे समय तक बैठे रहने के नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं होते। इसके मुकाबले दिनभर में छोटे-छोटे मूवमेंट ब्रेक लेना अधिक लाभकारी माना गया है।
किन लोगों को स्क्वाट्स करते समय सावधानी बरतनी चाहिए?
डॉक्टरों के अनुसार स्क्वाट्स हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होते। जिन लोगों को घुटनों का ऑस्टियोआर्थराइटिस, गंभीर मोटापा, जोड़ों में दर्द या संतुलन बनाए रखने में परेशानी है, उन्हें किसी भी नई एक्सरसाइज की शुरुआत डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करनी चाहिए।
सिटिंग जॉब करने वालों के लिए आसान उपाय
- हर 45 से 60 मिनट में कुर्सी से उठकर 2–3 मिनट टहलें।
- फोन पर बात करते समय चलते रहें।
- एक मीटिंग खत्म होने और दूसरी शुरू होने के बीच कुछ मिनट पैदल चलें।
- यदि स्वास्थ्य अनुमति देता है तो बीच-बीच में कुछ बॉडी-वेट स्क्वाट्स भी कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिनभर छोटे-छोटे अंतराल पर शरीर को सक्रिय रखने की आदत लंबे समय में ब्लड शुगर नियंत्रण, मेटाबॉलिज्म और समग्र स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।