नई दिल्ली: आईआईटी में दाखिले का सपना हर साल लाखों छात्र देखते हैं, लेकिन बिहार के सीतामढ़ी के रहने वाले छात्र गुंजा की सफलता की कहानी सबसे अलग है। खराब आंखों की रोशनी, गंभीर फेफड़ों की बीमारी और महीनों तक पढ़ाई छूटने जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जेईई एडवांस्ड परीक्षा में सफलता हासिल की। इस पूरे सफर में उनकी मां ने ऐसा त्याग और समर्पण दिखाया, जिसने इस सफलता को और भी प्रेरणादायक बना दिया।
मां ने खुद अटेंड की ऑनलाइन क्लास
गुंजा वर्ष 2023 में जेईई एडवांस्ड की तैयारी के लिए कोटा पहुंचे थे। उनकी आंखों का नंबर 9.5 होने के कारण लंबे समय तक पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। ऑनलाइन कक्षाओं में भी उन्हें परेशानी होती थी। ऐसे में उनकी मां ने खुद ऑनलाइन क्लास अटेंड करना शुरू किया ताकि पढ़ाई का कोई भी महत्वपूर्ण हिस्सा छूटने न पाए।
ह्यूमैनिटीज की छात्रा ने सीखी फिजिक्स और गणित
बी.एड. डिग्रीधारी गुंजा की मां का शैक्षणिक विषय ह्यूमैनिटीज रहा है। वर्षों बाद उन्होंने जेईई स्तर की फिजिक्स और गणित पढ़ना शुरू किया। जो विषय समझ में नहीं आता था, उसे शिक्षकों से दोबारा समझतीं और फिर विस्तार से नोट्स तैयार करतीं, ताकि बेटे की पढ़ाई प्रभावित न हो।
बीमारी ने बढ़ाई मुश्किलें
जेईई एडवांस्ड परीक्षा से कुछ महीने पहले भारी सामान उठाने के कारण गुंजा को न्यूमोथोरैक्स (फेफड़े के सिकुड़ने) की गंभीर समस्या हो गई। इस वजह से उन्हें करीब तीन महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उनका पूरा ध्यान इलाज और स्वास्थ्य सुधार पर रहा, जिससे पढ़ाई लगभग रुक गई।
हर दिन तैयार करती रहीं पढ़ाई का पूरा रिकॉर्ड
जब गुंजा पढ़ाई करने की स्थिति में नहीं थे, तब उनकी मां रोज समय पर ऑनलाइन क्लास में शामिल होतीं। पूरे व्याख्यान के दौरान नोट्स तैयार करतीं और बाद में उन्हें व्यवस्थित तरीके से दोबारा लिखतीं, ताकि बेटे के स्वस्थ होने के बाद पढ़ाई बिना किसी रुकावट के शुरू हो सके।
फिजिक्स और गणित उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण विषय थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कई विषयों को बार-बार समझकर सटीक नोट्स तैयार किए।
बेटे ने कहा- सफलता में मां की बराबर हिस्सेदारी
गुंजा का कहना है कि बीमारी के दौरान उनकी मां ने उनकी पढ़ाई को रुकने नहीं दिया। उन्होंने नियमित रूप से कक्षाएं अटेंड कीं, नोट्स बनाए और हर संभव सहयोग किया। उनके मुताबिक, आज मिली सफलता में उनकी मां की उतनी ही भागीदारी है, जितनी उनकी खुद की।
IIT Delhi का सपना नहीं छोड़ा
गंभीर बीमारी के बावजूद गुंजा ने आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई करने का सपना नहीं छोड़ा। मां के लगातार सहयोग और हौसले ने उन्हें मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा। स्वस्थ होने के बाद उन्होंने छूटी हुई पढ़ाई पूरी की और लगातार मेहनत करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंच गए।
कोटा के कोचिंग सिस्टम पर मां की राय
गुंजा की मां का कहना है कि कोटा का कोचिंग सिस्टम अनुशासित और संसाधनों से भरपूर है। यहां अनुभवी शिक्षक छात्रों को सही मार्गदर्शन देते हैं। हालांकि उनका मानना है कि पढ़ाई के साथ परिवार का भावनात्मक सहयोग भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि यही कठिन समय में छात्रों को मानसिक मजबूती देता है।
अन्य अभिभावकों को दिया खास संदेश
उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता केवल अंक और रैंक पर निर्भर नहीं होती। कई बार माता-पिता का विश्वास, सहयोग और हौसला ही बच्चे की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है।
10 जून को पूरी हुई वर्षों की मेहनत
10 जून को जेईई एडवांस्ड का परिणाम घोषित हुआ और गुंजा ने आईआईटी में प्रवेश का अपना सपना पूरा कर लिया। यह सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि उस मां के समर्पण और संघर्ष की भी जीत है, जिसने बेटे का सपना पूरा करने के लिए खुद दोबारा छात्र बनने का फैसला किया।