नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के भीतर जारी सियासी उठापटक के बीच भारतीय जनता पार्टी ने ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेता राहुल सिन्हा ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने अपने ही सांसदों और विधायकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया, जिसके चलते कई नेताओं ने साथ छोड़ने का फैसला किया।
राहुल सिन्हा ने ममता बनर्जी पर साधा निशाना
राहुल सिन्हा ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस में सांसदों और विधायकों के साथ नौकरों जैसा व्यवहार किया जाता था। उन्होंने कहा कि चुनाव में हार के बाद हुई एक समीक्षा बैठक में पार्टी नेताओं को निर्देश दिया गया था कि जब अभिषेक बनर्जी बैठक कक्ष में प्रवेश करें तो सभी खड़े होकर उनका स्वागत करें और उनके बाहर जाने पर भी फिर से खड़े हों।
बीजेपी नेता के मुताबिक, जिन नेताओं में आत्मसम्मान था, उन्होंने इस तरह के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि सत्ता रहने तक कई लोग चुप रहे, लेकिन राजनीतिक परिस्थितियां बदलने के बाद उन्होंने पार्टी छोड़ना बेहतर समझा।
बागी गुट के दावे का किया जिक्र
राहुल सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी के उस दावे का भी उल्लेख किया, जिसमें कहा गया था कि चुनावी हार के बाद हुई बैठक में विधायकों को अभिषेक बनर्जी के स्वागत के लिए खड़े होकर तालियां बजाने के निर्देश दिए गए थे।
हार के बाद पार्टी में बढ़ी अंदरूनी खींचतान
विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के 60 से अधिक नवनिर्वाचित विधायकों का समर्थन प्राप्त है। वहीं, यह भी दावा किया गया है कि लोकसभा में पार्टी के 28 में से 20 सांसद एनसीपीआई में शामिल होकर केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन दे चुके हैं।
चंद्रिमा भट्टाचार्य ने छोड़े सभी पद
इसी बीच तृणमूल कांग्रेस को एक और बड़ा झटका तब लगा जब पश्चिम बंगाल इकाई की अध्यक्ष और पूर्व मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राज्य अध्यक्ष बनने के करीब एक महीने बाद ही अपना पद छोड़ने का फैसला लिया। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी नेतृत्व को इसकी जानकारी दी।
ममता बनर्जी ने भी दी थी प्रतिक्रिया
पार्टी कार्यालय को लेकर विवाद और संगठन में बढ़ती हलचल के बीच ममता बनर्जी ने कहा था कि वह उन कार्यकर्ताओं के साथ मजबूती से खड़ी हैं जो पार्टी के प्रति वफादार बने हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों से कई नेता सार्वजनिक बयान दे रहे हैं, लेकिन उन्होंने चुप्पी बनाए रखी क्योंकि कई बार मौन भी बहुत कुछ कह देता है।