महाराष्ट्र सरकार ने स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। राज्य में अब स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में ‘Sting’ जैसी एनर्जी ड्रिंक्स और किसी भी तरह के नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से बैन लगा दिया गया है। विधानसभा में भारी बहस के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ‘FDA’ मंत्री नरहरी झिरवाल ने इस फैसले की घोषणा की। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पूरे देश में बच्चों के बीच एनर्जी ड्रिंक्स की बढ़ती लत को लेकर चिंता जताई जा रही है।
“शराब से भी ज्यादा खतरनाक है यह लत”
यह पूरा मामला बीजेपी विधायक विक्रम पाचपुते द्वारा विधानसभा में उठाए जाने के बाद गरमाया। चर्चा के दौरान विधायकों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ‘Sting’ और इसके जैसी अन्य एनर्जी ड्रिंक्स की बोतलों पर साफ तौर पर लिखा होता है कि यह ‘बच्चों के लिए अनुशंसित नहीं है’ इसके बावजूद ये ड्रिंक्स स्कूलों के ठीक बाहर धड़ल्ले से बेची जा रही हैं।
विधायक पाचपुते ने सदन में बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“अगर बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर इसके लॉन्ग टर्म असर को देखा जाए, तो यह एनर्जी ड्रिंक स्कूली बच्चों के लिए शराब से भी ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है।” विधायकों ने सरकार से मांग की है कि क्या भविष्य में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को ऐसी ड्रिंक्स बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी घोषित किया जा सकता है?
FSSAI के रडार पर आईं 6 बड़ी कंपनियां
महाराष्ट्र सरकार का यह फैसला देश की शीर्ष खाद्य नियामक संस्था FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) की कार्रवाई से भी मेल खाता है। FSSAI ने हाल ही में ‘Sting’, ‘Red Bull’, ‘Monster’ और ‘Campa Energy’ जैसी 6 बड़ी एनर्जी ड्रिंक कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
FSSAI का मानना है कि ये कंपनियां विज्ञापनों में “शरीर और दिमाग को तुरंत ऊर्जा देने” या “फोकस बढ़ाने” जैसे भ्रामक दावे करती हैं। डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इन ड्रिंक्स में कैफीन और चीनी की मात्रा इतनी अधिक होती है कि यह बच्चों के दिल की धड़कन, नींद और मानसिक एकाग्रता को बुरी तरह प्रभावित करती है। यह वास्तविक ऊर्जा नहीं, बल्कि कुछ समय के लिए थकान को दबाने का एक जरिया है।
मिलावट और नशीले पदार्थों पर भी होगी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
सदन में सिर्फ एनर्जी ड्रिंक्स ही नहीं, बल्कि स्कूलों के बाहर फ्लेवर्ड पान, मावा और अन्य संदिग्ध नशीले पदार्थों की बिक्री का मुद्दा भी गूंजा। विधायकों ने शिकायत की कि बच्चों को आकर्षित करने वाले फ्लेवर्ड मिल्क में भी भारी मात्रा में चीनी और हानिकारक केमिकल्स मिलाए जा रहे हैं।
इस पर मंत्री नरहरी झिरवाल ने कड़ा रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि सरकार ने इन सभी संदिग्ध प्रोडक्ट्स की जांच के लिए एक हाई-लेवल इंटरनल कमेटी का गठन कर दिया है।
आगे क्या होगा?
FDA को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत जमीनी स्तर पर कार्रवाई शुरू करें और स्कूलों के 500 मीटर के भीतर ऐसी ड्रिंक्स की ब्रिकी को रोकें। राज्य के सभी स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे बच्चों और अभिभावकों के लिए जागरूकता सत्र आयोजित करें, ताकि उन्हें इन अत्यधिक कैफीन वाले पेय पदार्थों के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जा सके।