नई दिल्ली: घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए लोग वास्तु नियमों का पालन करते हैं। माना जाता है कि जिस तरह घर के मंदिर के लिए एक निश्चित स्थान तय किया जाता है, उसी तरह धार्मिक ग्रंथों को भी सही दिशा और उचित स्थान पर रखना जरूरी होता है। रामायण, भगवत गीता और अन्य पवित्र पुस्तकों को रखने से जुड़े नियमों को वास्तु शास्त्र में विशेष महत्व दिया गया है।
अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि धार्मिक ग्रंथों को पूजा स्थल में रखना चाहिए या किसी अलग स्थान पर, कौन सी दिशा इसके लिए शुभ मानी जाती है और क्या इन्हें बेडरूम या स्टडी रूम में रखना उचित होता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार सही स्थान और दिशा में रखे गए धार्मिक ग्रंथ शुभ प्रभाव प्रदान करते हैं।
किस दिशा में रखने चाहिए धार्मिक ग्रंथ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार धार्मिक ग्रंथों और पूजा से जुड़ी पुस्तकों को घर की पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। वहीं पूजा स्थल के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा को सबसे उपयुक्त बताया गया है।
मान्यता है कि इस दिशा में पूजा स्थान होने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही सूर्य को ज्ञान और धर्म का प्रतीक माना जाता है, इसलिए धार्मिक पुस्तकों को सूर्योदय की दिशा यानी पूर्व में रखने की सलाह दी जाती है।
धार्मिक ग्रंथ रखने के लिए कौन सा स्थान माना जाता है उचित?
धार्मिक पुस्तकों को हमेशा आराध्य देव की मूर्ति या तस्वीर के बाईं ओर रखने की सलाह दी जाती है। कई लोग इन्हें मंदिर की शेल्फ में रख देते हैं, लेकिन वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से बचना चाहिए।
इसके अलावा धार्मिक ग्रंथों को मंदिर के ऊपर रखने की भी सलाह नहीं दी जाती। ऐसे स्थानों पर भी इन्हें नहीं रखना चाहिए जहां आसपास गंदगी हो। साथ ही बेडरूम में धार्मिक पुस्तकों को रखने से बचने की बात कही गई है।
धार्मिक ग्रंथ रखते समय किन बातों का रखें ध्यान?
यदि घर में रामायण, भगवत गीता, हनुमान चालीसा या अन्य धार्मिक पुस्तकें रखी जा रही हैं तो उन्हें एक-दूसरे के ऊपर रखकर नहीं रखना चाहिए। इनके लिए घर में अलग स्थान या अलग शेल्फ निर्धारित करना बेहतर माना जाता है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार धार्मिक ग्रंथों को खड़ी स्थिति में रखने के बजाय व्यवस्थित रूप से रखना चाहिए। साथ ही इन्हें लाल या पीले रंग के कपड़े में लपेटकर रखने की सलाह दी जाती है। काले या नीले रंग के कपड़े में धार्मिक पुस्तकों को रखने से बचने की बात कही गई है।
मान्यता है कि धार्मिक ग्रंथों को सम्मान और उचित दिशा के साथ रखने पर घर में सकारात्मक वातावरण और खुशहाली बनी रहती है।