लखनऊ : उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां मजदूरी कर परिवार चलाने वाले घर की बेटी को आयकर विभाग से करोड़ों रुपये की कथित अघोषित आय का समन मिलने के बाद हड़कंप मच गया। बीए की पढ़ाई कर रही छात्रा के नाम पर करीब 20.98 करोड़ रुपये के कारोबार और आय का हिसाब मांगा गया, जिसके बाद पूरा परिवार सदमे में आ गया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा के आधार और पैन कार्ड का कथित तौर पर दुरुपयोग कर उसके नाम पर फर्जी फर्म संचालित की गई थी।
20.98 करोड़ रुपये का हिसाब मांगते ही परिवार में मचा हड़कंप
उन्नाव के गिरिजाबाग मोहल्ला निवासी मजदूर परिवार की बेटी रश्मि सविता को आयकर विभाग की ओर से नोटिस जारी किया गया। नोटिस में कथित अघोषित आय और बड़े स्तर के कारोबार से जुड़े सवाल पूछे गए।
रश्मि के मुताबिक, 30 अप्रैल को आयकर विभाग चंडीगढ़ की ओर से आयकर अधिनियम की धारा 131(1A) के तहत समन जारी किया गया था। इस समन के जरिए उनसे 5 मई तक अपना पक्ष रखने को कहा गया।
परिवार का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है और घर मजदूरी के सहारे चलता है। ऐसे में करोड़ों रुपये की आय से जुड़ा नोटिस उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं था।
आधार और पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग का आरोप
रश्मि ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद उन्होंने कई विभागों के चक्कर लगाए, जिसके बाद जानकारी मिली कि उनके आधार और पैन कार्ड का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया गया।
जानकारी के अनुसार उनके दस्तावेजों का उपयोग कर दिल्ली के संतनगर बुराड़ी क्षेत्र में आरएस इंटरप्राइजेज नाम से एक फर्म संचालित की गई थी।
बताया गया कि यह फर्म 15 जनवरी 2025 को शुरू हुई और 9 मई 2025 को बंद कर दी गई। आरोप है कि करीब पांच महीने तक उनके दस्तावेजों के जरिए गतिविधियां चलती रहीं।
आयकर विभाग को दिया जवाब, कार्रवाई की मांग
रश्मि ने पूरे मामले में कानूनी प्रक्रिया अपनाते हुए आयकर विभाग को जवाब भेज दिया है। साथ ही जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर आधार और पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग की जानकारी दी है।
इसके अलावा पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र देकर मामले में शामिल लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही आयकर विभाग को भी पूरे मामले की जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की गई है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और संबंधित एजेंसियों से तथ्य जुटाए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि छात्रा के दस्तावेजों का इस्तेमाल किसने और किस उद्देश्य से किया।