अयोध्या राम मंदिर में ‘दान और चढ़ावे’ में भारी हेरफेर और चोरी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित की गई विशेष जांच टीम ‘SIT’ की गोपनीय रिपोर्ट ने राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर चल रहे एक बड़े नेक्सस “सांठगांठ” को बेनकाब कर दिया है। 140 से 150 पन्नों की इस जांच रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।
हिडन कैमरे ने खोली पोल
यह पूरा मामला तब खुला जब मंदिर के भीतर लगे हिडन CCTV कैमरों और कुछ पूर्व कर्मचारियों व इंजीनियरों के बयानों से दान प्रबंधन में हो रही गड़बड़ी के पुख्ता सबूत मिले।
जांच में सामने आया है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के कैश और सोने-चांदी को जब मंदिर से बैंक में ट्रांसफर करने के लिए ले जाया जाता था, तब नोटों के बंडलों से बड़ी सफाई से पैसे गायब कर दिए जाते थे। इतना ही नहीं, ट्रस्ट के पैसों और लेनदेन में भारी ‘कमीशनखोरी’ का खेल भी चल रहा था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मंदिर के दानपात्रों की चाभियां उन अनऑथराइज्ड लोगों के पास थीं, जिनका ट्रस्ट में कोई आधिकारिक पद ही नहीं है।
चंपत राय और गोपाल राव से घंटों पूछताछ, करीबी भी रडार पर
SIT की इस गोपनीय रिपोर्ट ने ट्रस्ट के शीर्ष नेतृत्व को सीधे कटघरे में खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट के आधार पर, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, व्यवस्थापक गोपाल राव और ट्रस्टी अनिल मिश्रा की प्रशासनिक भूमिका पर गंभीर सवाल उठे हैं। जांच टीम इन सभी से घंटों तक कड़ी पूछताछ कर चुकी है। चंपत राय के बेहद करीबी और उनके पूर्व ड्राइवर रहे टिन्नू यादव की भूमिका भी इस पूरे खेल में संदिग्ध पाई गई है। कुछ निजी और सरकारी बैंकों के कर्मचारी भी इस जांच के दायरे में हैं, जो इस वित्तीय गड़बड़ी में शामिल थे।
इस मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अयोध्या दौरे के दौरान, विवादों में घिरे चंपत राय को सीएम के कार्यक्रमों से पूरी तरह दूर रहने के सख्त निर्देश दिए गए थे।
दर्ज होगी FIR, बदला जाएगा सिस्टम
सूत्रों के मुताबिक, SIT ने शासन को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बेहद कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है, दान चोरी और लापरवाही में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ तुरंत मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए। राम मंदिर ट्रस्ट के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव किया जाए। वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मंदिर प्रबंधन की कमान आईएएस स्तर के एक सरकारी मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) को सौंपी जाए, ताकि दान के एक-एक पैसे का हिसाब साफ रहे।