मध्य प्रदेश की राजनीति में इस वक्त एक बहुत बड़ा भूचाल आ चुका है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ कुंभ 2028 की जमीनों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव सीधे तौर पर विपक्ष के निशाने पर आ गए हैं। कांग्रेस ने दिल्ली से लेकर भोपाल तक मोर्चा खोलते हुए मुख्यमंत्री पर पद के दुरुपयोग, ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है।
क्या है पूरा मामला?
कांग्रेस के राष्ट्रीय मीडिया अध्यक्ष पवन खेड़ा और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज खुलासे किए। कांग्रेस का दावा है कि ‘उज्जैन मास्टर प्लान 2035’ के तहत आने वाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लैंड-यूज़ ‘जमीन के उपयोग की श्रेणी’ बदला गया और प्रशासनिक फाइलों की अंदरूनी जानकारी का इस्तेमाल करके मुख्यमंत्री के परिवार ने औने-पौने दामों पर जमीनें ब्लॉक कर लीं।
विपक्ष द्वारा लगाए गए मुख्य आरोप हैं
सिंहस्थ क्षेत्र पर कब्जा: कांग्रेस के मुताबिक, साल 2028 में जहां ‘सिंहस्थ कुंभ मेला’ आयोजित होना है, उस नोटिफाइड ज़ोन की 168 एकड़ जमीन में से 111 एकड़ जमीन अकेले मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार के सदस्यों ने खरीद ली है।
कुल 253 एकड़ का हेरफेर: विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद और उससे ठीक पहले, सरकारी रसूख का इस्तेमाल कर कुल 253 एकड़ जमीन के सौदों में हेरफेर की गई है, जिससे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री परिवार को फायदा पहुंचे।

‘शेयर बाजार जैसी इनसाइडर ट्रेडिंग हुई है’ – पवन खेड़ा
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने मुख्यमंत्री के पुराने विभागों ‘उच्च शिक्षा और पर्यटन’ का हवाला देते हुए कहा कि मोहन यादव के पास इस मास्टर प्लान की हर गुप्त जानकारी पहले से थी।
पवन खेड़ा ने आगे कहा की “यह सीधे तौर पर ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ और ‘इनसाइडर ट्रेडिंग’ का मामला है। जब आपके पास पहले से फाइल की जानकारी हो और आप मुख्यमंत्री बनते ही वहां जमीनें खरीदने लगें, तो इसे भ्रष्टाचार के अलावा क्या नाम दिया जाएगा?”
खेड़ा ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के ‘आदर्श हाउसिंग सोसाइटी घोटाले’ का उदाहरण देते हुए पूछा कि जब वहां सिर्फ एक रिश्तेदार के नाम पर फ्लैट होने से इस्तीफा हो सकता है, तो इतने बड़े कुंभ क्षेत्र की जमीन खरीदे जाने के बाद भी मोहन यादव पद पर क्यों बने हुए हैं?
‘जनता की आस्था पर छुरा घोंपा जा रहा है’
इस पूरे विवाद को कांग्रेस ने एक बड़ा धार्मिक और नैतिक मोड़ दे दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उज्जैन और अयोध्या जैसे शहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदू आस्था के केंद्र हैं। लोग पेट काटकर, अपनी गाढ़ी कमाई बचाकर सिंहस्थ कुंभ में डुबकी लगाने आते हैं। ऐसे पावन क्षेत्र की जमीनों को ‘प्रॉपर्टी डीलिंग’ का अड्डा बनाना देश के करोड़ों श्रद्धालुओं के भरोसे का कत्ल करने जैसा है।
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी तंज कसा और आरएसएस के एक पुराने नारे को बदलते हुए कहा— “अयोध्या, उज्जैन तो झांकी है, मथुरा-काशी बाकी है।”
कांग्रेस की मांग
मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख जीतू पटवारी ने इस मामले में आर-पार की लड़ाई का एलान किया है। कांग्रेस ने मांग की है की, मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार द्वारा पिछले कुछ सालों में खरीदी गई सभी संपत्तियों को लेकर सरकार तुरंत एक “वाइट पेपर” जारी करे। इस पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी या फिर अदालत की निगरानी में कराई जाए।
अब आगे क्या?
कुंभ मेले की जमीनों से जुड़े होने के कारण यह मामला अब सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहने वाला। कांग्रेस इसे जमीन स्तर पर एक बड़ा जन-आंदोलन बनाने की तैयारी में है, जबकि बीजेपी इसे मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश बता रही है। बहरहाल, महाकाल की नगरी से उठा यह सियासी तूफान आने वाले दिनों में मध्य प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की राजनीति को गरमाए रखेगा।