पश्चिम कोलकाता का औद्योगिक क्षेत्र तारातला बुधवार दोपहर अचानक चीखों और मलबे के गुबार से दहल उठा। एक निर्माणाधीन गोदाम (Under-construction Warehouse), जिसे भविष्य में व्यापार का केंद्र बनना था, वह ढहकर वहां काम कर रहे दर्जनों मजदूरों की कब्रगाह बन गया। बुधवार दोपहर गोदाम की भारी-भरकम छत अचानक ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई। ऑल इंडिया रेडियो की रिपोर्ट के अनुसार, इस वीभत्स हादसे में अब तक 5 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि आशंका है कि 40 से 45 लोग अभी भी मलबे के नीचे दबे हुए हैं।
यह हादसा सिर्फ एक प्राकृतिक संयोग नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में बरती जा रही सुरक्षा और सामग्री की गुणवत्ता (Quality Checklist) पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है।
मलबे के नीचे दबी जिंदगी: अपनों की तलाश में जुटी भीड़
घटना के वक्त गोदाम के भीतर बड़े पैमाने पर ढलाई और निर्माण का काम चल रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक एक जोरदार आवाज हुई और पूरी छत नीचे आ गिरी, जिससे मजदूरों को भागने तक का मौका नहीं मिला। हादसे के तुरंत बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और अपनों की तलाश में स्थानीय लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी: समय के खिलाफ ‘जंग’
- सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर तुरंत मोर्चा संभालते हुए निम्नलिखित टीमों को तैनात किया गया है:
- कोलकाता पुलिस और दमकल विभाग की कई गाड़ियां।
- आपदा प्रबंधन समूह (DMG) और नागरिक सुरक्षा (Civil Defence) के खोजी दस्ते।
कोलकाता के तारातला इलाके में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया, जब ब्रेस ब्रिज के पास स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर एक निर्माणाधीन गोदाम की छत अचानक ढह गई। इस हादसे में करीब 40 से 45 लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत गिरने की आवाज बेहद तेज थी, जिसे सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में घटनास्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पूरे इलाके को घेर लिया और राहत कार्य में बाधा न आए, इसके लिए आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई।
तेज किया गया रेस्क्यू ऑपरेशन
मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मौके पर भारी मशीनरी, क्रेन और जेसीबी की मदद से लोहे के बड़े-बड़े बीम हटाए जा रहे हैं। प्रशासन के अनुसार सेना के जवान भी राहत कार्य में शामिल हो गए हैं, जिससे अभियान को और गति मिली है।
घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया
अब तक निकाले गए घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है।
हादसे के कारणों की जांच शुरू
फिलहाल हादसे की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है, लेकिन शुरुआती जांच में निर्माण कार्य के दौरान घटिया सामग्री के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए और छत गिरने की असली वजह क्या थी। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।