नई दिल्ली: लंबे समय से जारी तनाव और सैन्य टकराव के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच करीब चार महीने से जारी संघर्ष को समाप्त मानते हुए समझौते को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की गई।
समझौते के बाद इसकी प्रतियां ईरान और मध्यस्थता कर रहे देशों को भेज दी गई हैं। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकेर गालिबाफ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस प्रक्रिया का हिस्सा बन चुके थे।
हस्ताक्षर के बाद दिखा कूटनीतिक माहौल
समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मौजूदगी चर्चा में रही। हस्ताक्षर प्रक्रिया पूरी होने के बाद नेताओं ने औपचारिक रूप से एक-दूसरे का अभिवादन किया और मौजूद प्रतिनिधियों ने इस घटनाक्रम का स्वागत किया।
समझौते में किन बातों पर बनी सहमति?
समझौते के तहत ईरान को बड़े स्तर पर निवेश और आर्थिक सहयोग देने की रूपरेखा तैयार की गई है।
- ईरान को 300 अरब डॉलर तक निजी निवेश मिलने की योजना
- खाड़ी क्षेत्र के देशों के जरिए निवेश प्रक्रिया को बढ़ावा
- 150 अरब डॉलर के आर्थिक प्रतिबद्धता प्रस्ताव पर सहमति
- जब्त संपत्तियों से जुड़ी रकम चरणबद्ध तरीके से जारी करने की योजना
- तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात में राहत देने का प्रस्ताव
- अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज क्षेत्र में सामान्य आवाजाही बहाल करने की तैयारी
- अमेरिका की ओर से क्षेत्रीय सैन्य उपस्थिति में बदलाव की प्रक्रिया
- अगले 60 दिनों में अंतिम समझौते को लेकर नई वार्ता
- ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में सहमति
- परमाणु हथियार नहीं बनाने की गारंटी से जुड़ा आश्वासन
- परमाणु कार्यक्रम की अंतरराष्ट्रीय निगरानी का प्रावधान
- अंतिम समझौते को वैश्विक स्तर पर मंजूरी दिलाने की प्रक्रिया
डील की कॉपी भी आई सामने
समझौते के बाद ईरानी राष्ट्रपति ने हस्ताक्षरित दस्तावेज़ की प्रति सार्वजनिक रूप से दिखाई। इस दस्तावेज़ को दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को खत्म करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अब आगे की बातचीत और अंतिम समझौते पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।