लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को जून के महीने में लगे ‘10% फ्यूल सरचार्ज’ (FPPAS) के झटके ने सरकार और बिजली विभाग के बीच टकराव को चरम पर पहुँचा दिया है। मामला इतना बढ़ गया है कि उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने सीधे UPPCL के चेयरमैन आशीष गोयल को पत्र लिखकर जवाब-तलब किया है।
ऊर्जा मंत्री क्यों हैं नाराज?
मंत्री ए.के. शर्मा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
- बिना अनुमति महंगाई: मंत्री का आरोप है कि सरकार को भरोसे में लिए बिना बिजली महंगी क्यों की गई?
- मीडिया से मिली जानकारी: मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें विभाग के अहम फैसलों की जानकारी टीवी चैनलों के जरिए मिल रही है, जो सरकार की छवि खराब करने की साजिश की तरह है।
- लापरवाही का आरोप: उन्होंने मुख्यालय से चेयरमैन की अनुपस्थिति और अनुभवी कर्मचारियों को हटाने जैसे फैसलों को ‘जनहित के खिलाफ’ बताया है।
नियामक आयोग (Regulatory Commission) का डंडा
सिर्फ मंत्री ही नहीं, बल्कि राज्य विद्युत नियामक आयोग ने भी इसे अवैध करार दिया है।
- नियामक आयोग ने 10% ईंधन अधिभार को अवैध बताते हुए UPPCL को पहले ही नोटिस भेजा था।
- एक हफ्ते बीतने के बावजूद जब जवाब नहीं आया, तो आयोग ने अब प्रबंध निदेशक को 19 जून तक का अल्टीमेटम दिया है।
- यूपी विद्युत उपभोक्ता परिषद की याचिका के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है।
सप्लाई का नया रिकॉर्ड बनाम बिलों का ‘शॉक’
एक तरफ सरकार बिजली सप्लाई के नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है, तो दूसरी तरफ आम उपभोक्ता बिल में बढ़ोतरी से परेशान हैं।
- ऐतिहासिक रिकॉर्ड: ऊर्जा मंत्री शर्मा के अनुसार, 25 मई 2026 को रात 10:39 बजे राज्य में बिजली की मांग 31,804 मेगावाट पहुँच गई थी, जो देश में अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है।
- विरोधाभास: जहाँ एक ओर बिजली सप्लाई के मामले में यूपी देश में नंबर-1 बन रहा है, वहीं विभाग के ‘सरप्राइज’ फैसले सरकार की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
मंत्री शर्मा ने X (ट्विटर) पर कई पोस्ट में लिखा कि उत्तर प्रदेश बिजली सप्लाई में लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। ये आंकड़े राज्य और देश के इतिहास में सबसे ऊंचे हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, रात 10:01 बजे 31,774 मेगावाट बिजली सप्लाई हुई, जो पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ गई. उसके बाद 10:39 बजे यह बढ़कर 31,804 मेगावाट हो गई।
