भारत में गर्भाशय “यूटेरस” कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यह महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में से एक है। हालांकि भारत में इसके मामले दुनिया के अन्य विकसित देशों की तुलना में कम हैं, लेकिन हालिया रिपोर्टों में ग्रामीण और गरीब महिलाओं में भी इसके मामलों में तेज़ी देखी जा रही है।
डॉक्टरों के अनुसार बदलती जीवनशैली, मोटापा, हार्मोनल असंतुलन और बढ़ती उम्र इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। दुनिया के कई देशों की तरह भारत में भी यूटेरस कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुछ रिसर्च के मुताबिक “एंडोमेट्रियल” यानी यूटेरस कैंसर के मामलों में हर साल लगभग 1 से 3 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की जा रही है।
क्या होता है यूटेरस कैंसर?
यूटेरस कैंसर गर्भाशय की अंदरूनी परत “एंडोमेट्रियम” में शुरू होता है। जिसे मेडिकल लैंग्वेज में “एंडोमेट्रियल कैंसर” भी कहा जाता है। यह महिलाओं के प्रजनन तंत्र से जुड़ा एक गंभीर कैंसर है, लेकिन अगर समय रहते इसकी पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है।
भारत में कितना बढ़ रहा है खतरा?
भारत में गर्भाशय के कुल कैंसर मामले लगभग 2.5 परसेंट है हालांकि, खराब जीवनशैली और देर से शादी जैसी आदतों के कारण इसके मामलों में तेजी से उछाल आ रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अनुमान है कि भविष्य में इसमें लगभग 50% तक की वृद्धि हो सकती है भारत में इसके मामलों की दर काफी कम है हर साल लगभग 17,000 से अधिक नए मामले दर्ज किए जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बढ़ता मोटापा, डायबिटीज़ और हार्मोनल समस्याएं इसके पीछे बड़ी वजह हैं।

पहला संकेत क्या होता है?
यूटेरस कैंसर का सबसे आम और शुरुआती लक्षण असामान्य ब्लीडिंग है। खासकर अगर किसी महिला का “पीरियड साइकिल” बंद हो चुका हो और उसके बाद भी ब्लीडिंग होने लगे, तो इसे बिल्कुल नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।

यूटेरस कैंसर के प्रमुख लक्षणों में पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग होना, मेनोपॉज़ के बाद ब्लीडिंग होना, सफेद या पानी जैसा असामान्य डिस्चार्ज होना, पेट या पेल्विक हिस्से में दर्द होना, संभोग के दौरान दर्द होना, बार-बार पेशाब करने में परेशानी होना, अचानक वजन कम होना और कमजोरी महसूस होना शामिल हैं।
किन महिलाओं को ज्यादा खतरा?
50 साल या उससे ज्यादा के उम्र की महिलाओं, मोटापे से पीड़ित महिलाओं या जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास रहा हो या शारीरिक गतिविधियों की कमी वाली महिलाओं में यूटेरस कैंसर का खतरा अधिक देखा जाता है।
कैसे करें बचाव?
डॉक्टर्स का कहना है की यूटेरस कैंसर से बचाव के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना, वजन नियंत्रित रखना, रोज़ाना व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना और किसी भी असामान्य ब्लीडिंग को नज़रअंदाज़ न करना बहुत ज़रूरी है। साथ ही समय-समय पर स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना भी आवश्यक है।
यूटेरस कैंसर एक ऐसी बीमारी है जिसकी शुरुआती पहचान जीवन बचा सकती है। जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शरीर में होने वाले छोटे-से-छोटे बदलाव पर भी ध्यान देना चाहिए और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
दुनिया भर में यूटेरस कैंसर के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं। अध्ययनों के अनुसार पिछले दो दशकों में इसके मामलों में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि साल 2040 तक वैश्विक स्तर पर इसके मामलों में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।