अक्सर जिम जाने वाले युवाओं के हाथों में आपने ‘क्रिएटिन’ का डिब्बा देखा होगा। अब तक इसे केवल मसल बनाने और मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने वाला सप्लीमेंट माना जाता था,लेकिन इसे लेकर मेडिकल साइंस की दुनिया में एक बड़ा शिफ्ट आया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जो क्रिएटिन आपकी बॉडी बनाता था, वही अब आपके दिमाग को ‘सुपरचार्ज’ करने के काम आएगा। इजी लैंग्वेज में कहें तो क्रिएटिन अब मसल्स के लिए ‘बल्क’ और दिमाग के लिए ‘बुद्धि’ दोनों दे रहा है।
दिमाग का ‘अनलिमिटेड पावर बैकअप’
हमारा ब्रेन शरीर का सबसे भूखा हिस्सा है,यह अकेले ही 20% एनर्जी डकार जाता है। न्यूरोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, क्रिएटिन ब्रेन में ATP (ऊर्जा का सिक्का) के लेवल को गिरने नहीं देता।
एक्सपर्ट्स का कहना है की, “क्रिएटिन सिर्फ एक सप्लीमेंट नहीं, बल्कि एक ‘नेचुरल परफॉरमेंस एन्हांसर’ है। यह ब्रेन फॉग को हटाकर आपको सुपर-फोकस्ड बनाता है।”
क्यों हो रहा है यह ‘ट्रेंडिंग’?
रिसर्च कहती है कि क्रिएटिन शॉर्ट-टर्म मेमोरी को शार्प करता है और कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग को आसान बनाता है। यह केवल डोले नहीं बनाता, बल्कि दिमाग के न्यूरोट्रांसमीटर्स को बैलेंस कर Anxiety और Depression जैसी समस्याओं से लड़ने में मदद करता है। अगर आप नेटफ्लिक्स देख रहे हैं या रात भर जागकर प्रोजेक्ट पूरा कर रहे हैं, तो क्रिएटिन उस थकान और चिड़चिड़ेपन को खत्म करता है जो नींद की कमी से होती है। बढ़ती उम्र में अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसी बीमारियों के खिलाफ यह एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।
वेजिटेरियंस के लिए ‘वरदान’
अगर आप शाकाहारी हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत अच्छी है, चूंकि क्रिएटिन ज्यादातर नॉन-वेज खाने में मिलता है, शाकाहारियों में इसकी कमी अक्सर देखी जाती है। ऐसे में क्रिएटिन सप्लीमेंट आपके मानसिक प्रदर्शन में एक ‘मैजिकल जंप’ ला सकता है।
‘क्रिएटिन’ लेने से पहले ये जान लें
क्रिएटिन ‘सेफ’ है, लेकिन ‘सेल्फ-मेडिकेशन’ से बचें। अगर आप क्रिएटिन ले रहे हैं और पानी कम पी रहे हैं, तो आप गलती कर रहे हैं। कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। ‘ज्यादा मतलब बेहतर’ नहीं होता। 3 से 5 ग्राम की डेली डोज काफी है। अगर किडनी से जुड़ी कोई पुरानी हिस्ट्री है, तो इससे दूरी बनाना ही समझदारी है।