ब्रेस्ट कैंसर को लेकर अब वो पुरानी मेंटालिटी बदल चुकी है कि यह सिर्फ 50 की उम्र के बाद होने वाली बीमारी है। मेडिकल एक्सपर्ट्स के लिए चिंता की बात यह है कि अब 20 और 30 साल की यंग विमेंस इसकी चपेट में तेजी से आ रही हैं। बदलती लाइफस्टाइल और एनवायरनमेंट ने इस खतरे को हम तक पहुंचा दिया है।
यंग जनरेशन में क्यों बढ़ रहा है रिस्क?
ग्लोबल हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके पीछे जेनेटिक्स के साथ-साथ हमारी मॉडर्न चॉइस भी जिम्मेदार हैं:
• करियर और पर्सनल गोल्स के कारण देर से शादी और पहले बच्चे के जन्म में देरी को एक बड़ा रिस्क फैक्टर माना जा रहा है।

• प्रोसेस्ड डाइट, वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर की वजह से फिजिकल एक्टिविटी में कमी और टॉक्सिन्स का बढ़ता एक्सपोजर हमारे हार्मोन्स को असंतुलित कर रहा है।
• एक्सपर्ट्स की मानें तो कम उम्र में होने वाला कैंसर काफी ज्यादा ‘एग्रेसिव’ होता है, जो शरीर में तेजी से फैलता है।
इन 4 लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
कैंसर से बचने का सबसे अच्छा तरीका ‘अर्ली डिटेक्शन’ जल्द पहचान करना है:
• महीने में कम से कम एक बार ‘Self Breast Examination’ की आदत डालें। अपने शरीर के बदलावों को खुद पहचानना सीखें।
अक्सर यंग महिलाएं यह सोचकर लापरवाही कर देती हैं कि “अभी तो मैं बहुत छोटी हूँ।” लेकिन अगर आपको ये संकेत दिखें, तो तुरंत अलर्ट हो जाएं:
- ब्रेस्ट या आर्मपिट में कोई भी नई गांठ। याद रखें, हर गांठ में दर्द होना जरूरी नहीं है।
- स्किन का रंग बदलना या उसका ‘संतरे के छिलके’ जैसा खुरदरा होना।
- साइज या बनावट में कोई भी अचानक आया बदलाव।
- निप्पल से किसी भी तरह का असामान्य डिस्चार्ज होना।
एक्सपर्ट्स के 4 गोल्डन रूल्स
• अपनी प्लेट में जंक फूड की जगह सब्जियां और फल शामिल करें और डेली कम से कम 30 मिनट का वर्कआउट सुनिश्चित करें।

• स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाएं, क्योंकि ये सीधे तौर पर कैंसर सेल्स को ट्रिगर करते हैं।

• अगर फैमिली में कैंसर की हिस्ट्री रही है, तो रेगुलर स्क्रीनिंग और जेनेटिक टेस्टिंग को अपनी हेल्थ चेकअप लिस्ट में टॉप पर रखें।
एक्सपर्ट्स का कहना है की आपकी सेहत आपकी प्रायोरिटी होनी चाहिए। किसी भी लक्षण को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। एक छोटी सी जांच आपकी जान बचा सकती है।