लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) और केकेआर के बीच रविवार को खेले गए मुकाबले में रोमांच तब अपने चरम पर पहुंच गया, जब युवा बल्लेबाज अंगकृष रघुवंशी को एक दुर्लभ तरीके से आउट करार दिया गया। अंगकृष आईपीएल इतिहास के मात्र चौथे ऐसे खिलाड़ी बन गए हैं, जो ‘फील्ड में बाधा डालने’ (Obstructing the Field) के कारण पवेलियन लौटे।
इकाना में क्या हुआ? ‘थ्रो और पैर’ का वो ड्रामा
पारी के 5वें ओवर में प्रिंस यादव की गेंद पर रघुवंशी ने मिड-ऑन की तरफ शॉट खेलकर रन चुराना चाहा, लेकिन कैमरून ग्रीन ने उन्हें वापस भेज दिया। रघुवंशी ने क्रीज में लौटने के लिए डाइव लगाई, लेकिन उसी वक्त फील्डर का थ्रो उनके पैर पर जा लगा। एलएसजी के कप्तान ऋषभ पंत की अपील के बाद थर्ड अंपायर ने इसे ‘जानबूझकर बाधा डालना’ माना और रघुवंशी को आउट करार दिया।
आईपीएल के वो 4 ‘विवादित’ शिकार: यूसुफ से रघुवंशी तक
- आईपीएल के 19 सालों के इतिहास में अब तक केवल चार ही बल्लेबाज इस तरह आउट हुए हैं:
- यूसुफ पठान (2013): पुणे वॉरियर्स के खिलाफ गेंद को पैर से हटाने की कोशिश में।
- अमित मिश्रा (2019): सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ रन लेते समय रास्ता बदलने के कारण।
- रवींद्र जडेजा (2024): आरसीबी के खिलाफ फील्डर के थ्रो के बीच में आने पर।
- अंगकृष रघुवंशी (2026): लखनऊ के खिलाफ थ्रो रोकने के प्रयास में।
क्या है ‘Obstructing the Field’ का नियम?
क्रिकेट के नियम 37 के अनुसार, अगर कोई बल्लेबाज खेल के दौरान जानबूझकर अपने शब्दों या कार्यों से फील्डिंग टीम को बाधित करने की कोशिश करता है, तो उसे आउट दिया जाता है।
इरादा (Intent) है अहम: अगर अंपायर को लगता है कि बल्लेबाज ने अनजाने में या खुद को चोट से बचाने के लिए ऐसा किया है, तो उसे आउट नहीं दिया जाता (जैसा 2019 वर्ल्ड कप फाइनल में बेन स्टोक्स के साथ हुआ था)।
हैंडलिंग द बॉल: पहले हाथ से गेंद रोकना अलग नियम था, लेकिन अब इसे भी इसी कैटेगरी में शामिल कर दिया गया है।
इंटरनेशनल क्रिकेट का ताजा उदाहरण
हाल ही में दिसंबर 2023 में बांग्लादेश के मुश्फिकुर रहीम को न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में गेंद को हाथ से धकेलने के कारण इसी नियम के तहत आउट दिया गया था।