भागदौड़ भरी जिंदगी में पैरों में दर्द होना एक आम बात मानी जाती है। अक्सर लोग इसे दिन भर की थकान या मांसपेशियों का खिंचाव समझकर पेनकिलर खा लेते हैं या मालिश करके छोड़ देते हैं। लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स और कई रिपोर्ट्स के अनुसार, पैरों का यह ‘मामूली’ सा दिखने वाला दर्द Peripheral Artery Disease (PAD) जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति का शुरुआती लक्षण हो सकता है।

साइलेंट किलर बन सकता है पैरों का दर्द
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, जब पैरों की धमनियों (Arteries) में कोलेस्ट्रॉल या फैट जमा हो जाता है, तो ब्लड सर्कुलेशन अस्त-व्यस्त होने लगता है। इसे ही मेडिकल भाषा में PAD कहा जाता है। अगर समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो यह आगे चलकर हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का कारण बन सकता है।
किन बीमारियों की तरफ है ये इशारा?
सिर्फ PAD ही नहीं, पैरों का लगातार दर्द इन 4 बड़ी समस्याओं का भी संकेत हो सकता है:
डायबिटीज: हाई ब्लड शुगर के कारण पैरों की नसें डैमेज होने लगती हैं, जिससे झुनझुनी और असहनीय दर्द महसूस होता है।

डीप वेन थ्रॉम्बोसिस: पैर की गहराई में स्थित नसों में खून का थक्का जमना। यह स्थिति तब खतरनाक हो जाती है जब यह थक्का रक्त के साथ फेफड़ों तक पहुँच जाए।

विटामिन की कमी: शरीर में विटामिन B12 और D की कमी सीधे तौर पर हड्डियों और नसों के दर्द से जुड़ी होती है।

गठिया: जोड़ों में सूजन और यूरिक एसिड बढ़ने से भी पैरों में लगातार दर्द बना रहता है।

एक्सपर्ट्स की राय
हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है की अगर आपको चलने पर दर्द होता है और रुकने पर आराम मिलता है, तो यह वैस्कुलर प्रॉब्लम हो सकती है। इसे नजरअंदाज करना आपके दिल की सेहत के लिए भारी पड़ सकता है।”
इन लक्षणों को न करें इग्नोर
पैरों का बार-बार सुन्न होना या ठंडा पड़ना।
पैरों की त्वचा के रंग में बदलाव जैसे नीला या पीला पड़ना।
बिना किसी चोट के पैरों में सूजन आना।
रात में सोते समय पैरों में ऐंठन होना।
बचाव के उपाय
डॉक्टरों का मानना है कि जीवनशैली में छोटे बदलाव जैसे रोज़ाना 30 मिनट की वॉक, संतुलित आहार, और समय-समय पर कोलेस्ट्रॉल व शुगर की जांच से इन खतरों को 80% तक कम किया जा सकता है।