आजकल सोशल मीडिया पर “Oatzempic” नाम का एक नया वेट लॉस चैलेंज आग की तरह फैल रहा है। दावा किया जा रहा है कि ये नार्मल ओट्स ड्रिंक, हॉलीवुड और बॉलीवुड में मशहूर वजन घटाने वाली दवा ‘Ozempic’ की तरह ही असरदार है। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स का क्या कहना है इस पर!
क्या है वायरल ‘Oatzempic’ रेसिपी?
इस ट्रेंड में लोग एक खास ड्रिंक को सुबह खाली पेट पीने की सलाह दे रहे हैं। इसे बनाने के लिए:
आधा कप कच्चे ओट्स, एक कप पानी और आधा नींबू का रस, इन तीनों को ब्लेंड करके एक स्मूदी तैयार की जाती है। इन्फ्लुएंसर्स का दावा है कि इसे पीकर आप महज 8 हफ्तों में लगभग 18 किलो तक वजन कम कर सकते हैं।

इस ड्रिंक का नाम ‘Ozempic’ दवा से इंस्पायर्ड है, जो असल में टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए बनाई गई थी लेकिन वजन घटाने में इसके जादुई असर के कारण ये पूरी दुनिया में चर्चा में आ गई।
साइंस क्या कहता है?
डॉक्टर्स का कहना है की ‘Ozempic’ दवा शरीर के GLP-1 हार्मोन को इफ़ेक्ट करती है जिससे दिमाग को पेट भरे होने का मेसेज मिलता है। इसके अपोजिट, ‘Oatzempic’ सिर्फ एक फाइबर युक्त ड्रिंक है। इसमें मौजूद Beta-glucan फाइबर पेट में जाकर फूल जाता है, जिससे आपको भूख कम लगती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह “हार्मोनल बदलाव” नहीं बल्कि केवल “पेट भरने” का अहसास है।

वजन घटने का असली गणित
न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति भारी नाश्ते को छोड़कर सिर्फ इस 150 कैलोरी वाले ओट ड्रिंक को पीता है, तो वो कैलोरी डेफिसिट में चला जाता है। वजन इसी कमी के कारण घटता है, न कि ओट्स और नींबू के किसी स्पेशल मैजिकल मिक्सिंग से।
फायदे कम, जोखिम ज्यादा
डॉक्टर्स और न्यूट्रिशनिस्ट्स एक्सपर्ट ने इस ट्रेंड को लेकर कुछ सीरियस वॉर्निंग्स दी हैं:
ओट्स में फाइबर तो है, लेकिन इस ड्रिंक में प्रोटीन और हेल्दी फैट्स जीरो के बराबर हैं। इसे लंबे समय तक मील रिप्लेसमेंट के रूप में लेने से मांसपेशियां कमजोर हो सकती हैं।

कच्चे ओट्स और नींबू का मिश्रण हर किसी को सूट नहीं करता। इससे गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी की समस्या बढ़ सकती है।
एक महीने में 8-10 किलो वजन घटाना शरीर के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे पित्त की पथरी और मेटाबॉलिज्म खराब होने का खतरा रहता है।
हेल्थ एक्सपर्ट्स का इस पर कहना है की ‘Oatzempic’ वजन घटाने का कोई “शॉर्टकट” या “मैजिक” नहीं है। यह एक स्वस्थ आहार का हिस्सा तो हो सकता है, लेकिन इसे दवा का विकल्प मानना या केवल इसी पर निर्भर रहना सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।