भारत में पिछले कुछ सालों में डेटा की खपत यानि “डाटा कंजम्पशन” ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। लेकिन अब इंटरनेट यूजर्स के लिए एक परेशान करने वाली खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार मोबाइल डेटा के इस्तेमाल पर एक नया ‘इंटरनेट डेटा टैक्स’ लगाने की तैयारी में है। अगर ये नियम लागू होता है, तो आपके मंथली रिचार्ज प्लान्स की कीमतें काफी बढ़ सकती हैं।
क्या है सरकार का प्लान?
रिपोर्ट के अनुसार, सरकार अब पर GB के हिसाब से डेटा पर टैक्स लेने का प्लान बना रही है। “डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस” को ऑर्डर दिए गए हैं कि वो सितंबर 2026 तक इस टैक्स को लागू करने के लिए एक ठोस फ्रेमवर्क तैयार करे।
टेक एनालिस्ट्स का कहना है कि अगर गवर्नमेंट महज 1 रुपए पर GB का Tax भी इम्पोज करती है, तो इससे सरकारी तिजोरी में सालाना 23,000 करोड़ रुपए का एडिशनल रेवेन्यू जेनरेट होगा। इस टैक्स का एक बड़ा उद्देश्य ‘डिजिटल एडिक्शन’ को कम करना भी है, ताकि लोग अनावश्यक रूप से घंटों सोशल मीडिया पर समय न बिताएं।
आम आदमी और डिजिटल इकोनॉमी पर प्रभाव
डेटा टैक्स का सबसे सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो वर्क-फ्रॉम-होम करते हैं या ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़े हैं। टेलीकॉम कंपनियां इस टैक्स का बोझ सीधा ग्राहकों पर डालेंगी, जिससे रिचार्ज पोर्टफोलियो में 15-20% की बढ़ोतरी देखी जा सकती है।
यूट्यूबर्स और इंस्टाग्राम इन्फ्लुएंसर्स के लिए वीडियो अपलोडिंग और स्ट्रीमिंग अब और ज्यादा खर्चीली हो जाएगी। डिजिटल इंडिया के तहत गांवों तक पहुँच रही इंटरनेट सेवाओं की गति इस टैक्स की वजह से धीमी पड़ सकती है।
टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि जहां एक तरफ यह राजस्व बढ़ाने का अच्छा जरिया है, वहीं दूसरी तरफ यह “डिजिटल इंडिया” अभियान की स्पीड को बाधित कर सकता है। इंटरनेट डेटा टैक्स का आना तय लग रहा है, लेकिन इसकी दरें क्या होंगी, इस पर अंतिम फैसला आना बाकी है।