ज्योतिष शास्त्र में ‘ग्रहों के राजा’ कहे जाने वाले सूर्य देव जल्द ही अपना राशि परिवर्तन करने जा रहे हैं। 15 मार्च 2026 को सूर्य कुंभ राशि की अपनी यात्रा समाप्त कर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करेंगे। इस खगोलीय घटना को ‘मीन संक्रांति’ के नाम से जाना जाता है।
हालांकि, इस बार का गोचर सामान्य नहीं है। मीन राशि में पहले से ही न्याय के देवता शनि विराजमान हैं। सूर्य और शनि के बीच ‘पिता-पुत्र’ का संबंध होने के बावजूद ज्योतिष में इन्हें शत्रु माना जाता है। ऐसे में इन दोनों दिग्गजों की युति देश-दुनिया सहित सभी 12 राशियों पर गहरा प्रभाव डालेगी।
इन राशियों पर मंडराएंगे मुश्किलों के बादल
ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य के इस गोचर से 14 अप्रैल 2026 तक का समय निम्नलिखित राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है:
मेष (Aries): खर्चों में अप्रत्याशित वृद्धि और मानसिक तनाव। इस दौरान निवेश से बचें।
सिंह (Leo): आत्मविश्वास में कमी और कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों से अनबन की संभावना। सेहत का खास ख्याल रखें।
तुला (Libra): गुप्त शत्रुओं से परेशानी और कानूनी उलझनों के योग। वाणी पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होगा।
मीन (Pisces): आपकी ही राशि में सूर्य-शनि की युति हो रही है। यह समय भ्रम और वैवाहिक जीवन में कड़वाहट पैदा कर सकता है।
मीन संक्रांति और खरमास का आरंभ
सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करते ही ‘खरमास’ लग जाएगा। शास्त्र सम्मत मान्यताओं के अनुसार, इस पूरे एक महीने तक विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। अब शुभ कार्यों की शुरुआत 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में जाने (मेष संक्रांति) के बाद ही होगी।
ज्योतिषीय उपाय
यदि आपकी राशि पर प्रतिकूल प्रभाव दिख रहा है, तो ज्योतिषाचार्य निम्नलिखित उपाय सुझाते हैं: आदित्य हृदय स्तोत्र का नियमित पाठ करें। तांबे के पात्र में जल लेकर उसमें कुमकुम और लाल फूल डालकर सूर्य को अर्घ्य दें। रविवार के दिन नमक के सेवन से परहेज करें और गुड़ का दान करें।
इस आर्टिकल में दी गई जानकारी एस्ट्रोलॉजी वर्ल्ड की जनरल मान्यता के डेटा पर बेस्ड है। Indianpresshouse इन दावों की पुष्टि नहीं करते। अपनी लाइफ के किसी भी बड़े फैसले के लिए किसी एक्सपर्ट या प्रोफेशनल एस्ट्रोलॉजर की सलाह जरूर लें।