मेटा (Meta) के सबसे चर्चित Ray-Ban Smart Glasses इस वक्त अपनी हाई-टेक खूबियों के कारण नहीं, बल्कि प्राइवेसी के गंभीर आरोपों की वजह से सुर्खियों में हैं। हाल ही में कंपनी पर एक ‘Class Action Lawsuit’ यानि सामूहिक मुकदमा दायर किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूजर्स के निजी और अंतरंग पलों को विदेशी कॉन्ट्रैक्टर्स द्वारा देखा जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
एक हालिया स्वीडिश मीडिया रिपोर्ट के बाद यह कानूनी बवाल शुरू हुआ। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केन्या में काम कर रहे थर्ड-पार्टी कॉन्ट्रैक्टर्स को ऐसे वीडियो देखने और ‘लेबल’ करने के लिए दिए गए जो यूजर्स के बेडरूम और बाथरूम जैसे निजी स्थानों पर रिकॉर्ड हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई रिकॉर्डिंग्स तब हुईं जब यूजर्स को यह अहसास भी नहीं था कि उनका चश्मा एक्टिव है।

मुकदमे के 3 सबसे बड़े पॉइंट्स:
मुकदमे में कहा गया है कि मेटा ने चश्मे को “प्राइवेसी-फर्स्ट” डिवाइस के रूप में बेचा, लेकिन ये कभी डिस्क्लोज नहीं किया कि ह्यूमन रिव्युवर इन वीडियो क्लिप्स को एक्सेस करेंगे।
AI को बेहतर बनाने के नाम पर मेटा ने सेंसिटिव फुटेज ‘जिसमें फिजिकल रिलेशन और बैंक कार्ड की डिटेल्स शामिल थीं’ को कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ शेयर किया है।
कंपनी का दावा है कि वो डेटा शेयरिंग से पहले चेहरे को ‘ब्लर’ कर देती है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार ये फीचर कई बार फेल हो जाता है, जिससे लोगों की पहचान उजागर होने का खतरा बना रहता है।

रेगुलेटर्स की बढ़ती सख्ती
केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूनाइटेड किंगडम का डेटा रेगुलेटर (ICO) भी इस मामले को लेकर सतर्क हो गया है। प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये आरोप साबित होते हैं, तो मेटा को भारी जुर्माने के साथ-साथ अपनी डेटा ट्रेनिंग पॉलिसी में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।
टेक वर्ल्ड का क्या कहना है?
टेक एक्सपर्ट्स लंबे समय से ‘Wearable AI’ की प्राइवेसी को लेकर चेतावनी देते रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर बहस छेड़ दी है कि क्या स्मार्ट चश्मे जैसे डिवाइस वाकई हमारे जीवन में सुरक्षित हैं या ये सिर्फ हमारे घर के अंदर लगे ‘चलते-फिरते कैमरे’ हैं।