इंडोनेशिया सरकार और जुकरबर्ग की कंपनी Meta (Facebook, Instagram, WhatsApp) के बीच ‘कोल्ड वॉर’ अब खुलकर सामने आ गई है। सरकार ने साफ़ कर दिया है कि उनके प्लेटफॉर्म्स पर परोसा जा रहा ‘टॉक्सिक कंटेंट’ अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मेटा को फाइनल वार्निंग मिल चुकी है “या तो अपनी पॉलिसी सुधारो, या फिर देश से बाहर जाने के लिए तैयार रहो”।
एक्शन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति?
इंडोनेशिया के डिजिटल मंत्रालय ने मेटा की रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए उनकी क्लास लगा दी है। मिनिस्ट्री का कहना है कि मेटा का कंटेंट फिल्टर करने का सिस्टम पूरी तरह ‘फ्लॉप’ है: सरकार ने जितनी बार भी हानिकारक कंटेंट की शिकायत की, मेटा ने उनमें से केवल 28.47% पर ही एक्शन लिया। बाकी 71% कचरा अभी भी प्लेटफॉर्म पर मौजूद है।
ऑनलाइन गैंबलिंग, हेट स्पीच और फेक न्यूज़ का जाल बिछा हुआ है, जिस पर मेटा ने आँखें मूँद रखी हैं। इंडोनेशिया के आईटी हेड ने कहा की “मेटा फेक न्यूज़ और नफरत की दुकान चला रहा है, जो हमारे लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।”
16 से कम तो सोशल मीडिया बंद!
इंडोनेशिया अब बच्चों के लिए डिजिटल दुनिया को ‘सेफ ज़ोन’ बनाने के मिशन पर है। 28 मार्च 2026 से एक क्रांतिकारी बदलाव आने वाला है, 16 साल से कम उम्र के बच्चों का सोशल मीडिया पर जाना पूरी तरह बैन होगा। मेटा जैसी कंपनियों को अब ‘जुगाड़’ वाले नहीं, बल्कि सख्त एज-वेरिफिकेशन टूल्स लगाने होंगे।
क्या होगा अगर मेटा नहीं माना?
आईटी हेड का कहना है की अगर मेटा ने सरकार की बात को हल्के में लिया, तो उसके पास दो ही रस्ते बचेंगे: कंपनी के ग्लोबल रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा बतौर पेनल्टी देना होगा। फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप को पूरे देश में ब्लॉक कर दिया जाएगा।